onion crop

भूमि का चुनाव

प्याज को विभिन्न प्रकार की मृदाओं में उगाया जा सकता है, लेकिन अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए दोमट या बलुई दोमट मिट्टी, जिसमें जीवाश्म पदार्थ की प्रचुर मात्रा व जल निकास की उत्तम व्यवस्था हो। साथ ही मृदा का पीएच मान सामान्य (6.5-7.5) हो, सर्वोत्तम मानी जाती है।

खेत की तैयारी :

खेत में पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करने के बाद दो-तीन जुताई देसी हल अथवा हैरो द्वारा करें, जिससे कि मिट्टी के नीचे कठोर परत टूट जाए तथा मिट्टी भुरभुरी बन जाए। प्रत्येक जुताई के बाद पाटा अवश्य लगाएं।

खाद :

रबी प्याज में खाद एवं उर्वरक की मात्रा जलवायु व मिट्टी के प्रकार पर निर्भर करती है। अच्छी फसल लेने के लिए 20-25 टन अच्छी सड़ी गोबर खाद प्रति हेक्टेयर की दर से खेत की अंतिम तैयारी के समय मिला दें। इसके अलावा 100 किलोग्राम नत्रजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस व 50 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से डालें। नत्रजन की आधी मात्रा और फास्फोरस व पोटाश की संपूर्ण मात्रा रोपाई के पहले खेत में मिला दें। नत्रजन की शेष मात्रा को दो बराबर भागों में बांट कर रोपाई के 30 दिन तथा 45 दिन बाद छिड़क दें। इसके अतिरिक्त 50 किलोग्राम सल्फर व 5 किलोग्राम जिंक प्रति हेक्टेयर की दर से रोपाई के पूर्व डालना भी उपयुक्त रहेगा।

पौध रोपण का समय : दिसंबर-जनवरी।

सिंचाई :

प्याज की फसल में सिंचाई की आवश्यकता मृदा की किस्म, फसल की अवस्था व ऋतु पर निर्भर करती है। पौध रोपाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई अवश्य करें तथा उसके 2-3 दिन बाद फिर हल्की सिंचाई करें, जिससे कि मिट्टी नम बनी रहे व पौध अच्छी तरह से जम जाए। प्याज की फसल में 10-12 सिंचाइयां पर्याप्त होती है।

कंद बनते समय पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। बहुत अधिक सिंचाई करने से बैंगनी धब्बा रोग लगने की संभावना होती है, जबकि अधिक समय तक खेत में सूखा रहने की स्थिति में कंद फटने की समस्या आ सकती है। खुदाई से 15 दिन पहले सिंचाई बंद कर देनी चाहिए। टपक विधि के द्वारा सिंचाई करने से उपज में 15-20 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 40-50 प्रतिशत पानी की बचत होती है।

खुदाई :

जब 50 प्रतिशत पौधो की पत्तियां पीली पड़कर मुरझाने लगें, तब कंदों की खुदाई शुरू कर देनी चाहिए। इससे पहले या बाद में कंदों की खुदाई करने से कंदों की भंडारण क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

उपज :

रबी फसलों से औसतन 250-300 क्विंटल/हेक्टेयर तक उपज प्राप्त होती है।

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