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80 साल की उम्र में पूर्व विधायक सेब से बना रहे पालमपुर की पहचान

हिमाचल दस्तक। पालमपुर

आप उनकी उम्र पर नहीं जाएं, बल्कि उनके जज्बे को देखें। 85 साल की उम्र में भी जो व्यक्ति सीखने की ललक लिए काम किए जा रहा हो तो मिशाल तो बनेगा ही। हम बात कर रहे हैं पूर्व विधायक ज्ञान चंद मिन्हास की। एक राजनीतिज्ञ ही नहीं बल्कि एक किसान के नाते भी इनकी व्यापक पहचान है। जहां पर भी काम किया पूरी मेहनत से और हर जगह अपने नाम के अनुरूप ज्ञान प्राप्त करते हुए दूसरे के लिए मिशाल बन गए। जिला कांगड़ा की पालमपुर घाटी को चाय के लिए जाना जाता है।

इसी घाटी में कंडबाड़ी इलाका भी है, जहां गदियाड़ा गांव में ज्ञान चंद अपने परिवार के साथ रहते हैं। सेना से सेवानिवृत्त कैप्टन ज्ञान चंद ने राजनीति में कदम रखा और थुरल क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। ज्ञान चंद मिन्हास बताते हैं कि पिछले साल उन्होंने करीबन चालीस पेटी सेब उगाए थे। जिन्हें उन्होंने अपने मित्रों और रिश्तेदारों को बांट दिया था। इस मर्तबा उन्हें विश्वास है कि करीबन सौ पेटी सेब की वह निकाल लेंगे, क्योंकि फसल ठीक है और अब उसे बाजार में भेजेंगे, ताकि पालमपुर के सेब का जायका भी लोगों को पता चले।

कृषि विवि और बागवानी विभाग का मिला साथ

करीबन पांच साल पूर्व हिमाचल प्रदेष कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के बागवानी विशेषज्ञ डॉ. जगमोहन बडिय़ाल और हिमाचल प्रदेश बागवानी विभाग के फल संतति केंद्र पालमपुर के डॉ. हितेंद्र पटियाल से तकनीकी जानकारी लेने के बाद पूर्व विधायक ज्ञान चंद मिन्हास ने कंडबाड़ी क्षेत्र में अपने यहां सेब को लगाना आरंभ किया था। गदियाड़ा में उनके घर के साथ करीबन सौ पौधे सेब के लगे हैं। इसमें भरपूर फसल तैयार है, तो कुटाहणी में लगाए गए बागीचे में करीबन बारह सौ पौधें लगाए हैं।

मिन्हास बताते हैं कि लोचिंलिंग वैराइटी में अन्ना, डारसेट गोल्डन, माइकल, पिंक लेडी को लगाया है। साथ ही स्पर में गेलगाला, सुपरचीफ, रेडचीफ , स्कारलेट स्पर टू, आरगन स्पर टू और डलेसियिस में वांस डलेसियस, जिपसन गोल्डन, गोल्डन डिलिसियस, टॉप रेड की वैराइटी को उन्होंने अपने बागीचों में लगाया है।

कौन हैं कैप्टन ज्ञान चंद मिन्हास

पंजाब रेजीमेंट से सेवानिवृत्त कैप्टन ज्ञान चंद मिन्हास ने 1977 में जनता पार्टी के बैनर तले थुरल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। 1977 से 1982 तक उन्होंने थुरल विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनधित्व किया। उसके बाद राजनीति से किनारा करते हुए खेती-बाड़ी की तरफ मुड़े और उसमें रच बस गए। कुछ नया करने के चलते उन्होंने 2013-2014 में अपनी भूमि पर सेब को तैयार करने की सोची और बागवानी विशेषज्ञों से सलाह मशविरा करते हुए कंडबाड़ी क्षेत्र में सेब की फसल को लहलहा दिया है।

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