broccoli

इन सब्जियों की खेती बड़ी सुगमता पूर्वक की जा सकती है

जलवायु 

स्प्राउटिंग ब्रोकली फूल गोभी की तरह ही होती है लेकिन इसका रंग हरा होता है इसलिए इसे हरी गोभी भी कहते हैं। उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में जाड़े के दिनों में इन सब्जियों की खेती बड़ी सुगमता पूर्वक की जा सकती है। ब्रोकली के लिए ठंडी और आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है। यदि दिन अपेक्षाकृत छोटे हों तो फूल की बढ़ोतरी अधिक होती है।

भूमि

ब्रोकली की खेती विभिन्न प्रकार की भूमियों में की जा सकती है, किंतु गहरी दोमट भूमि जिसमें पर्याप्त मात्रा में जैविक खाद हो इसकी खेती के लिए अच्छी होती है। ब्रोकली की किस्में मुख्यतया तीन प्रकार की होती है- श्वेत, हरी व बैंगनी।

लगाने का समय

उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में ब्रोकली उगाने का उपयुक्त समय ठंड का मौसम होता है। इसके बीज के अंकुरण तथा पौधों को अच्छी वृद्धि के लिए तापमान 20-25 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। गोभी की भांति ब्रोकली के बीज बहुत छोटे होते हंै। लगभग 1 ग्राम बीज में 350 दाने होते हैं । एक छोटी क्यारी में लगाने के लिए एक ग्राम बीज पर्याप्त होता है।

नर्सरी तैयार करना

ब्रोकली की पत्ता गोभी की तरह पहले नर्सरी तैयार करते हैं और बाद में रोपण किया जाता है। कम संख्या में पौधे उगाने के लिए मिट्टी के गमले या काठ के बक्से लिए जा सकते हैं। इनके अभाव पौधों को जमीन पर उगाने के लिए 3 फुट लंबी और एक फुट चौड़ी तथा जमीन की सतह से 1.5 सें.मी. ऊंची क्यारी में बीज की बुआई की जाती है। क्यारी की अच्छी प्रकार से तैयारी करके एवं सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाकर बीज को पंक्तियों में 4-5 सें. मी. की दूरी पर 2.5 सें.मी. की गहराई पर बुआई करते हैं। नर्सरी में पौधों को कीटों से बचाव के लिए नीम का काढ़ा या गोमूत्र का प्रयोग करें।

पौध रोपण

पूर्ण रूप से तैयार क्यारी में पौध की रोपाई करते हैं। रोपाई के लिए पंक्ति से पंक्ति की दूरी 50 सें.मी. तथा पौध से पौध की दूरी 30 सें.मी. रखते हैं। शीर्ष का आकार पौधों के बीच अंतराल पर निर्भर करता है। बड़े आकार के शीर्ष प्राप्त करने के लिए दूरी कम रखनी चाहिए।

ऑर्गेनिक खाद

पौधों की अच्छी बढ़वार और अच्छे शीर्ष प्राप्त करने के लिए क्यारी की अंतिम बार तैयारी करते समय गोबर की अच्छे तरीके से सड़ी हुई खाद, कंपोस्ट खाद इसके अतिरिक्त ऑर्गेनिक खाद एक किलो ग्राम भू-पावर, एक किलोग्राम माइक्रो फर्टी सिटी कंपोस्ट, एक किलोग्राम माइक्रोनीम, एक किलोग्राम सुपर गोल्ड कैल्सी फर्ट और अरंडी की खली इन सब खादों को अच्छी तरह मिलाकर क्यारी में बुआई से पूर्व समान मात्रा में बिखेर लें इसके बाद क्यारी की जुताई करके बीज की बुआई करें और फसल जब 20-25 दिन की हो जाए तब सुपर गोल्ड मैग्नीशियम और माइक्रो झाइम का छिड़काव करें।

सिंचाई

पहली सिंचाई रोपण के तुरंत बाद की जाए और बाद की सिंचाई 8-10 दिन के अंतराल पर की जाती है।

खरपतवार

ब्रोकली की जड़ एवं पौधों की अच्छी बढ़वार के लिए के लिए क्यारी में से खरपतवार को बराबर निकालते रहना चाहिए। गुड़ाई करने से पौधों की बढ़ वार तेज होती है। गुड़ाई के उपरांत पौधे के पास मिट्टी चढ़ा देने से पौधे पानी देने पर गिरते नहीं हैं।

कटाई

ब्रोकली का मध्य भाग जिसे बंद कहते हैं हरे रंग का और फूल गोभी जैसा होता है। इसे हरी सब्जी के लिए प्रयोग किया जाता है। कटाई के लिए शीर्ष रोपण के 65-70 दिन बाद तैयार हो जाते हैं जब शीर्ष पूर्ण रूप से गंठे हुए विकसित हो जाए तब उनकी कटाई करनी चाहिए उसे इस स्थान से 5-7 सें.मी. नीचे काटे जहां से शीर्ष की शाखाएं शुरू हुई हों। कुछ किस्मों में शीर्ष की कटाई के बाद पत्तियों के कोने-कोने से छोटे-छोटे शीर्ष पुन: निकलते हैं। इनके विकसित हो जाने पर कटाई की जाती है।

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