beetroot

चुकंदर का सेवन कच्चा सलाद व जूस में विशेष स्थान रखता है

चुकंदर भी जड़ वाली सब्जियों में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। इसकी जड़ों को सब्जी व सलाद के रूप में अधिक प्रयोग करते हैं। एक परिवार के लिए भी गार्डन में उगाना विशेष महत्व रखता है। जड़ों का आकार शलजम जैसा होता है, लेकिन रंग अलग ही स्पेशल होता है। रंग को गहरा लाल कह सकते हैं। चुकंदर का सेवन कच्चा सलाद व जूस में विशेष स्थान रखता है। इसके अतिरिक्त इन्हें चीनी उद्योग में भी प्रयोग करते हैं। चुकंदर के प्रयोग से कुछ महत्वपूर्ण पोषक तत्व भी प्राप्त होते हैं, जैसे- प्रोटीन, कैल्शियम, आजीलिक एसिड, फास्फोरस तथा कार्बोहाइड्रेट्स आदि।

खेत की तैयारी

इस फसल की तैयारी उचित ढंग से करनी चाहिए। यदि भूमि रेतीली है, तो दो-तीन जुताई करें तथा कुछ भारी हो, तो पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें तथा अन्य 3-4 जुताई करके पाटा चलाएं और मिट्टी को बिल्कुल भुरभुरी कर लें, जिससे जड़ों की वृद्धि ठीक हो सके। तत्पश्चात छोटी-छोटी क्यारियां बनाएं। बगीचों में 3-4 गहरी जुताई-खुदाई करें। घास-फूस को बाहर निकालें तथा छोटी-छोटी क्यारियां बनाएं। मिट्टी को बारीक कर लें।

सिंचाई

बुआई के बाद फसल की सिंचाई 10-15 दिन के बाद करें। यदि पलेवा करके बुआई की है, तो नमी के अनुसार पानी लगाएं। ध्यान रहे कि पहली सिंचाई हल्की करें। शरद-ऋतु की फसल होने से 12-15 दिन के अंतराल से सिंचाई करते रहें अर्थात खेत में नमी बनी रहे। यदि गर्मी हो तो 8-10 दिन के अंतर से पानी देते रहें। बगीचों व गमलों के लिए सिंचाई का विशेष ध्यान रखें।

पहला पानी हल्का हो तथा अन्य पानी नमी के अनुसार 8-10 दिन के बाद देते रहें। गमलों में पानी 2-3 दिन के अंतर से दें। कोशिश करें कि पानी शाम के समय दें, जिससे मिट्टी कम सूखेगी और पौधों की अधिक वृद्धि होगी।

भूमि व जलवायु

चुकंदर की फसल को लगभग सभी प्रकार की मिट्टियों में पैदा किया जा सकता है। लेकिन सर्वोत्तम भूमि बलुई दोमट या दोमट मानी जाती है। कंकरीली व पथरीली मिट्टी में वृद्धि ठीक नहीं होती। भूमि का पीएच मान 6 से 7 के बीच होना चाहिए। सर्दी की फसल होने के कारण जलवायु ठंडी उपयुक्त रहती है। लेकिन इन्हें गर्म मौसम में भी उगाया जा सकता है।

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