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स्ट्रॉबेरी खाने से बीमारियों पर काबू पाया जा सकता है

स्ट्रॉबेरी शीतोष्ण जलवायु का पौधा है। स्ट्रॉबेरी की खेती हिमाचल में सबसे अधिक क्षेत्रफल यानी बड़े पैमाने पर होती है। स्ट्रॉबेरी में अनीमिया व क्लोरोसिस आदि बीमारियों की प्रतिरोधी क्षमता भी है। इसे नियमित खाने से इन बीमारियों पर काबू पाया जा सकता है। स्ट्रॉबेरी का उपयोग जैम, जैली व आइसक्रीम में भी किया जाता है…

जलवायु और मिट्टी संबंधी आवश्यकता

स्ट्रॉबेरी की खेती समशीतोष्ण एवं शीतोष्ण जलवायु में समुद्र तल से 1800 मीटर तक अच्छी प्रकार से की जा सकती है, जहां ठंड के मौसम में अधिक ठंड पड़ती है तथा फरवरी-मार्च में गर्मी आरंभ हो जाती है, परंतु ग्रीष्म ऋतु में अधिक गर्मी न पड़ती हो।

भूमि की तैयारी

स्ट्रॉबेरी की खेती उसर एवं मटियार भूमि को छोड़कर सभी प्रकार की भूमि में की जा सकती है। किंतु जीवांशयुक्त हल्की दोमट भूमि जिसमें जल निकास की समुचित व्यवस्था हो।

ऑर्गेनिक खाद

स्ट्रॉबेरी में खाद के संतुलित प्रयोग का महत्वपूर्ण स्थान है प्रति एकड़ खेत में 10-12 टन गोबर की सड़ी हुई खाद बुआई से 10-15 दिन पहले सामान मात्रा में खेत में बिखेर कर जुताई कर खेत तैयार करना चाहिए। गोबर की खाद देने से भूमि में जल धारण की क्षमता बढ़ जाती है, इसके अतिरिक्त अंतिम जुताई से पहले दो बैग-माइक्रो फर्टी सिटी कंपोस्ट वजन 40 किलोग्राम, दो बैग माइक्रो नीम वजन 20 किलोग्राम, दो बैग-माइक्रो भू-पावर वजन 10 किलोग्राम, 2 बैग-भू-पावर वजन 5 0 किलोग्राम, दो बैग सुपर गोल्ड कैल्सी फर्ट वजन 10 किलोग्राम इन सब खादों को अच्छी तरह मिलाकर मिश्रण तैयार कर सामान मात्रा में खेत में बिखेर कर जुताई कर खेत तैयार कर बुआई या रोपाई करनी चाहिए, 15-20 दिन बाद 500 मिलीलीटर माइक्रो झाइम और दो किलो सुपर गोल्ड और पांच लीटर नीम का काढ़ा 400 लीटर पानी में अच्छी तरह घोलकर मिलाकर पंप द्वारा तर बतर कर प्रति सप्ताह या प्रति 15-20 दिन बाद लगातार छिड़काव करते रहे इस तरह से आप भरपूर तंदरुस्त फसल, स्वादिष्ट फसल, रोग रहित फसल, विष मुक्त फसल आर्गेनिक फसल तैयार करें।

पौध लगाने की विधि

उभरी हुई क्यारियों में पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 सें.मी. तथा पौधे की पौधे से दूरी 20 सें.मी. रखते हैं। इस प्रकार करीब एक एकड़ में 40 हजार पौधों की आवश्यकता पड़ती है पौधे की रोपाई करते समय उसके अंकुरित भाग को जमीन से बाहर रखना चाहिए व तुरंत हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए, पौधे हमेशा शाम के समय ही लगाने चाहिए, पॉलीथीन लगी क्यारियों में पौधा लगाने से पूर्व पौधे के लगाने के स्थान पर एक क्रॉस कट लगाने के बाद पौधा लगाना चाहिए।

सिंचाई

पहली सिंचाई पौध लगाने के तुरंत बाद करनी चाहिए इसके पश्चात 10-15 दिन के अंतराल पर आवश्यकतानुसार करते रहना चाहिए, गर्मियों में सप्ताह में दो बार सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है। सिंचाई करते समय धूप का ध्यान अवश्य रखें, ताकि पौधे धूप में सिंचाई करने पर जलें न।

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