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brinjal farming

बैंगन एक पौष्टिक सब्जी

बैंगन में विटामिन-ए एवं बी के अलावा कैल्शियम, फॉस्फोरस तथा लोहे जैसे खनीज भी होते है। यदि इसकी उपयुक्त उत्तम किस्में तथा संकर किस्में बोई जाएं और उन्नत वैज्ञानिक क्रियाएं अपनाई जाएं, तो इसकी फसल से काफी अधिक उपज मिल सकती है।

बैंगन की किस्में

पूसा हाईब्रिड-5, पूसा हाईब्रिड-6, पूसा हाईब्रिड-9, पूसा क्रांति, पूसा -भैरव, पूसा-पर्पल कलस्टर, पूसा-बिंदु, पूसा-उत्तम 31, पूसा-उपकार, पूसा-अंकुर।

नर्सरी: इसके बीज उठी हुई क्यारियों में लगभग 1 सें.मी. की गहराई पर 5 से 7 सें.मी. के फासलों पर बनी कतारों में बोने चाहिएं। एक हेक्टेयर क्षेत्र में रोपाई के लिए लगभग 400 ग्राम बीज पर्याप्त हैं। संकर किस्मों के बीज की मात्रा 250 ग्राम पर्याप्त रहती है। भारी आकार वाली किस्मों के लिए पंक्ति से पंक्ति की दूरी 70 सें.मी. तथा पौधों से पौधों की दूरी 60 सें.मी. रखी जाती है।

बुआई : शरद फसल : इस फसल के बीज मई-जून में बोए जाते हैं और पौध रोपाई जून के अंत से जुलाई के मध्य तक की जा सकती है।

बसंत-ग्रीष्म : इस फसल के बीज नवंबर के मध्य में बोए जाते हैं और पौध जनवरी के अंत में तब रोपी जाती है, जब पाले का भय समाप्त हो जाता है।

वर्षा ऋतु: इस फसल के बीज फरवरी-मार्च के महीनों में बोए जाते हैं और पौध की रोपाई मार्च-अप्रैल के महीनों में की जाती है।

खाद और उर्वरक

खाद व उर्वरक की मात्रा मिट्टी की जांच के आधार पर की गई सिफारिश के अनुसार रखनी चाहिए। जहां मिट्टी की जांच न की हो, खेत तैयार करते समय 25-30 टन गोबर की सड़ी खाद मिट्टी में अच्छी तरह मिला देनी चाहिए। इसके साथ-साथ 200 किलोग्राम यूरिया, 370 किलोग्राम सुपर फॉस्फेट और 100 किलोग्राम पोटाशियम सल्फेट का इस्तेमाल करना चाहिए।

यूरिया की एक तिहाई मात्रा और सुपरफॉस्फेट तथा पोटाशियम सल्फेट की पूरी मात्रा खेत में आखिरी बार तैयारी करते समय इस्तेमाल की जानी चाहिए। बची यूरिया की मात्रा को दो बराबर खुराकों में देना चाहिए। पहली खुराक पौधे की रोपाई के 3 सप्ताह बाद दी जाती है, जबकि दूसरी मात्रा पहली मात्रा देने के चार सप्ताह बाद दी जानी चाहिए।

पौध संरक्षण

रोपाई के 2 सप्ताह बाद मोनोक्रोटोफास 0.04 प्रतिशत घोल, 15 मि.ली. प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें। प्ररोह बेधक से प्रभावित फलों और प्ररोहों को जहां से तना मुरझाया हो उसके आधे इंच नीचे से काट दें और उन्हें जमीन में गाढ़ दें। खेतों को बेधकों से मुक्त रखने के लिए यह काम प्रतिदिन करते रहें।

मोनोक्रोटोफोस के छिड़काव के 3 सप्ताह बाद डेसिस 0.005 प्रतिशत घोल या 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें। डेसिस के छिड़काव के 3 सप्ताह बाद ब्लिटाकस प्रति कैप्टान-2 ग्राम प्रति लीटर पानी और मिथाइल पेराथियोन-2 मि.ली. प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें। अगर जैसिड की समस्या हो, तो मिथाइल पेराथियोन का छिड़काव फिर से करें, लेकिन मिथाइल पेराथियोन छिड़कने से पहले फलों को तोड़ लें।

प्ररोह बेधक से प्रभावित फलों और प्ररोहों को जहां से तना मुरझाया हो उसके आधे इंच नीचे से काट दें और उन्हें जमीन में गाड़ दें। खेतों को बेधकों से मुक्त रखने के लिए यह काम प्रतिदिन करते रहें।

मोनोक्रोटोफोस के छिड़काव के 3 सप्ताह बाद डेसिस 0.005 प्रतिशत घोल या 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें। डेसिस के छिड़काव के 3 सप्ताह बाद ब्लिटाकस प्रति कैप्टान-2 ग्राम प्रति लीटर पानी और मिथाइल परथिओन-2 मि.ली. प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें। यदि जैसिड की समस्या हो, तो मिथाइल पेराथियोन का छिड़काव फिर से करें, लेकिन मिथाइल पेराथियोन छिड़कने से पहले फलों को तोड़ लें।

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