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Natural Farming

प्राकृतिक खेती अपना कर मिसाल बनने लगें घाटी के किसान-बागवान ठाकुर दास

हिमाचल दस्तक, राजीव बग्गा। बंजार

सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती के अंतगर्त ग्राम पंचायत खाबल के गांव पुजाली के किसान ठाकुर दास द्वारा प्राकृतिक खेती को अपना कर सेब के पौधों के साथ सब्जियों में भी जीवमृत डालना शुरू कर दिया है। बंजार के गांव पुजाली से संबध रखने वाले किसान-बागवान ठाकुर दास का कहना है कि उन्होंने सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती पर कृषि विभाग द्वारा आयोजीत शिमला के कुफरी में वर्ष 2018 में प्रशिक्षण शिविर में भाग लेकर प्रशिक्षण लिया। उन्होनें ने कहा कि जीवामृत बनाने के 21 दिनों के बाद पौधों की तौलियों में डालते है, व स्प्रे करते है।

इसके अलावा सप्तधान्यां, अंकुर अर्क, दशपर्गी अर्क, खटटी लस्सी और बह्यरत समय-समय पर प्रयोग करते है। उन्होनें बागवानी में मल्टीक्रोप में दालें और स्टोबैरी को भी उगाते है। सेब में स्पर प्रजाती के साथ स्काकेट, इवासनी सुपर चीफ, रैड चीफ, रेड विलाक्स, जेरोमाईन, ऐडम रैडलाक्स गाला व ग्रेनी स्मिथ के साथ स्टोन फ्रुट व इनके पौधों को भी तैयार किया जा रहा है। इस के अलावा बागवानी में सब्जियों का कार्य सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती से कर रहे है जिसमें टमाटर, शिमला मिर्च, मिर्च, वीन, मुली, साग और पालक, सुकैश, इत्यादि उगाए जा रहे है।

ठाकुर दास का कहना है कि घाटी के किसान प्राकृतिक खेती को अपना कर उत्पादों को जहर मुक्त बना सकते है व अपने उत्पादन से बीमारीयों से मृक्ति मिल सकती है। वहीं कृषि विभाग भी बंजार घाटी की विभिन्न पंचायतों में प्राकृतिक खेती अपनाने के जागरूता शिविरों का आयोजन कर रहा है। जिसमें लोग बढ़-चढ़ कर भाग ले रहे हैं।

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