pomegranate

जलवायु :

इसके लिए शीत काल में औसत ठंडक तथा ग्रीष्म में शुष्क व गर्म वातावरण अच्छा होता है। यह एक सीमा तक पाले को सहन कर लेता है। गुणवत्ता युक्त फल प्राप्त करने के लिए फलो के बढ़ते और पकते समय लगभग 4.0 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान होना चाहिए।

भूमि :

अनार सभी प्रकार की भूमियों में उगाया जा सकता है, परंतु गुणवत्तायुक्त अधिक उत्पादन के लिए भारी दोमट भूमि उपयुक्त होती है।

पौधरोपण :

इसके रोपण के 5 गुना 5 मीटर की दूरी पर 60 गुणा 60 गुणा 60 से.मी. आकार के गड्ढे बनाते हैं। उत्तरी भारत में पौधे फरवरी-मार्च में लगाए जाते हैं। प्रयोगों में देखा गया है कि यदि रोपण अंतर 5 गुणा 2 मीटर रखकर संघन रोपण किया जाए, तो उपज लगभग अढ़ाई गुना अधिक मिलती है।

सिंचाई :

अनार काफी हद तक सूखे के लिए प्रतिरोधी है फिर भी नियमित सिंचाई से फलोत्पादन अच्छा होता है। ग्रीष्म तथा सर्दकाल में क्रमश: 10 तथा 20 दिन के अंतर पर सिंचाई करते हैं। अनार के उद्यान की भूमि में नमी का लगभग समान स्तर बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि नमी के स्तर में तीब्र उतार-चढ़ाव से फल फटने की समस्या बढ़ जाती है। यदि भूमि शुष्क हो गई है, तो भारी सिंचाई नहीं देते हैं।

फल का चटना :

अनार में फलों का चटना एक गंभीर समस्या है, जो शुष्क क्षेत्रों में अधिक घातक हो जाती है। इसमें पूर्ण वृद्धि प्राप्त परिपक्व फल चटक जाते हैं। इससे भंडारण क्षमता गिर जाती है तथा वह बिक्री योग्य नहीं रहते, फल के वजन और रस में गिरावट आती है। भूमि में नमी के स्तर में अचानक और तीव्र-उतार चढ़ाव से फल चटक जाते हैं। इसके अतिरिक्त भूमि में बोरान की कमी को भी इसके लिए उत्तरदायित्व माना जाता है।

तुड़ाई :

अनार के फल, फूलने के 5-7 माह में तोडऩे लायक हो जाते हैं। पके हुए फल हल्के पीले और कभी-कभी गुलाबी लाल हो जाते हैं। फलों को सेक्रोटियर की सहायता से तोडऩा चाहिए।

उपज :

विभिन्न उम्र के पौधों की उपज भिन्न होती है, जो कि मृदा प्रकार, जलवायु आदि की व्यवस्था पर निर्भर करता है। फिर भी अच्छी तरह से विकसित 10 वर्ष पुराने पौधों से 80-120 फलों का उत्पादन होता है। आर्थिक रूप से 25-30 वर्ष तक वृक्षों से उत्पादन होता है।

कांट-छांट :

उष्ण व उपोष्ण जलवायु के क्षेत्रों में अनार के सदाबहार होने के कारण उसे कांट-छांट की जरूरत नहीं होती। शीतोष्ण जलवायु में इसका पौधा पर्णपाती होता है, इसलिए पौधों को सुडोल आकार देने के लिए प्रारंभिक वर्षों में सधाई की जाती है। इसमें मुख्य तने को एक मीटर ऊंचाई पर काट देते हैं और कटे भाग के नीचे से निकलने वाली शाखाओं में से 4-5 मुख्य शाखाओं को विकसित होने देते हैं।

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