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poultry farming

मुर्गी की बीट का प्रयोग खाद के लिए किया जाता है

देश की अर्थव्यवस्था में मुर्गीपालन का महत्वपूर्ण स्थान है। मुर्गी से प्राप्त उत्पाद जैसे अंडा मनुष्य शरीर को सुपाच्य प्रोटीन देने का एक प्रमुख स्त्रोत है। मुर्गी की बीट का प्रयोग खाद के लिए किया जाता है। करीब 40-50 मुर्गियों से प्राप्त बीट एक एकड़ जमीन के लिए पर्याप्त रहती है। मुर्गी की खाद में नाइट्रोजन, फास्फोरस तथा पोटाश काफी मात्रा में होता है। यह खाद खेती के लिए बहुत ही लाभकारी व उपजाऊ है…

मुर्गी पालन की विभिन्न शाखाओं जैसे बच्चे निकालना, पालन पोषण करना, संतुलित आहार, उपकरण तथा रोग नियंत्रण का काफी विकास हुआ है और अब यह कहा जा सकता है कि इस क्षेत्र में काफी हद तक आत्मनिर्भरता आ गई है।

इस व्यवसाय से अधिक से अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए सही-सही वैज्ञानिक जानकारी का होना अत्यंत आवश्यक है।

अब सर्दियों का मौसम है इस समय कुछ विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। हालांकि बड़ी मुर्गियां गर्मी की अपेक्षा सर्दी आसानी से सह लेती हैं। बड़ी मुर्गियों के मामले में केवल उनको गर्मी के समय ही सुरक्षित रखने की सावधानी बरतना ही काफी होता है। लेकिन अगर हम मुर्गी व्यवसाय से अधिक फायदा लेना चाहते हैं, तो चूजे लाने से पहले या बाद में निम्नलिखित बातें ध्यान में अवश्य रखनी चाहिए…

चूजों को ठंड से बचाने के लिए गैस ब्रूडर, बास के टोकने के ब्रूडर, चद्दर के ब्रूडर, पट्रोलियम गैस, सिगड़ी, कोयला, लकड़ी के गिट्टे, हीटर इत्यादि की तैयारी चूजे आने के पूर्व ही कर लेना चाहिए। जनवरी माह में अत्यधिक ठंड पड़ती है अत: इस माह में चूजा घर का तापमान 95 डिग्री फारनहाइट होना अतिआवश्यक है। फिर दूसरे सप्ताह से चौथे सप्ताह तक 5-5 डिग्री तापमान कम करते हुए 80 डिग्री फारनहाइट तक कर देना चाहिए।

इस मौसम में चूजों को ठंड लगने से सर्दी-खांसी होने का डर रहता है, इसलिए एक से दस दिन तक चूजों को टेट्रासाइक्लिन दवा एक लीटर पानी में एक ग्राम के हिसाब से एवं इसके साथ विटामिन दवा भी जैसे वाइमेराल को 100 मुर्गियों के लिए पांच मिलीलीटर देनी चाहिए। खासकर ठंड के मौसम में चूजा घर में प्रात:काल घर के अंदर कम से कम दो घंटा तक धूप का प्रवेश वांछनीय है। अत: चूजा घर का निर्माण इस बिंदू को ध्यान में रखते हुए उसकी लंबाई पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर होनी चाहिए।

शीतकालीन मौसम में मुर्गी आवास का प्रबंधन :

ठंड के दिनों में मुर्गी आवास को गर्म रखने के लिए हमे पहले से सावधान हो जाना चाहिए, क्योंकि जब तापमान 10 डिग्री सेंटीग्रेड से कम हो जाता है तब आवास के शीशे से ओस की बूंद टपकती है इससे बचने के लिए व्यवसायी को अच्छी ब्रूडिंग कराना तो आवश्यक है ही साथ ही मुर्गी आवास के ऊपर पैरा या बोरे, फट्टी आदी बिछा देना चाहिए एवं साइड के पर्दे मोटे बोरे के लगाने चाहिए, ताकि वे ठंडी हवा के प्रभात को रोक सकें।

रात में जाली का लगभग 2 फीट नीचे का हिस्सा पर्दों से ढक दें। इसमें खाली बोरी आदि का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे अंदर का तापमान बाहर की अपेक्षा ऊंचा रहेगा। साथ ही यह ध्यान में रखना चाहिए कि मुर्गी आवास में मुर्गियों की संख्या पूरी हो। जाड़े के मौसम में एक अंगीठी या स्टोव मुर्गीखाने में जला दें, पर अंगीठी अंदर रखने से पहले इसका धुआं निकाल लें। इस प्रकार दी गई थोड़ी सी गर्मी से न केवल मुर्गियां आराम से रहती हैं, बल्कि मुर्गी आवास का वातावरण भी खुश्क बना रहता है।

मुर्गी आवास की सफाई :

जाड़े के मौसम आने से पहले ही पुराना बुरादा, पुराने बोरे, पुराना आहार एवं पुराने खराब पर्दे इत्यादि अलग कर देना चाहिए या जला देना चाहिए। वर्षा का पानी यदि आवास के आसपास इक्क्ठा हो तो ऐसे पानी को निकाल देना चाहिए और उस जगह पर ब्लीचिंग पाउडर या चूना का बुरकाव कर देना चाहिए। फार्म के चारों तरफ उगी घास, झाड़, पेड़ आदि को नष्ट कर देना चाहिए। दाना गोदाम की सफाई करनी चाहिए एवं कॉपर सल्फेट युक्त चूने के घोल से पुताई कर देनी चाहिए। ऐसा करने से फंगस का प्रवेश दाना गोदाम में रोका जा सकता है एवं कुआं, दीवार आदि की सफाई भी ब्लीचिंग पाउडर से कर लेनी चाहिए।

दाने एवं पानी की खपत :

शीतकालीन मौसम में दाने की खपत बढ़ जाती है। यदि दाने की खपत बढ़ नहीं रही है तो इसका मतलब है कि मुर्गियों में बीमारी का प्रकोप चल रहा है। शीतकालीन मौसम में मुर्गियों के पास दाना हर समय उपलब्ध रहना चाहिए। शीतकालीन मौसम में पानी की खपत बहुत ही कम हो जाती है, क्योंकि पानी हमेशा ठंडा ही बना रहता है, इसलिए मुर्गी इसे कम मात्रा में पी पाती हैं। इस स्थिति से बचने के लिए मुर्गियों को बार-बार शुद्ध ताजा पानी बदलकर देते रहना चाहिए। इस प्रकार से अगर उपरोक्त बातों को ध्यान में रखा जाए तो हमारे मुर्गीपालक मुर्गियों को ठंड से तो बचाएंगे ही पर साथ ही अच्छा उत्पादन लेकर अधिक लाभ भी कमा सकेंगे।

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