pumpkin farming

जलवायु

इसके लिए गर्म जलवायु की आवश्यकता होती है, परंतु इसे पाले से तरबूज और खरबूजे की तुलना में कम हानि होती है वैसे कम गर्म और अधिक नमी वाले क्षेत्रों में कद्दू अधिक फैलता है। इसकी उचित बढ़वार के लिए पाले रहित चार महीने का मौसम अनिवार्य है।

भूमि

इसके लिए उचित जल निकास वाली हल्की दोमट भूमि सर्वोत्तम मानी गई है। 6.0-6.5 पीएच मान वाली भूमि इसकी खेती के लिए उपयुक्त रहती है। हालांकि मध्यम अम्लीय में भी इसे उगाया जा सकता है। चूंकि यह उथली जड़ वाली फसल है, अत: इसके लिए अधिक जुताइयों की आवश्यकता नहीं होती। दो-तीन बार कल्टीवेटर चलाकर पाटा लगाएं।

बोने का समय

बोने का समय इस बात पर निर्भर करता है कि इसे कहां पर उगाया जा रहा है। मैदानी क्षेत्रों में इसे साल में निम्न दो बार बोया जाता है फरवरी-मार्च, जून-जुलाई। पर्वतीय क्षेत्रों में इसकी बुआई मार्च-अप्रैल में की जाती है। नदियों के किनारे इसकी बुआई दिसंबर में की जाती है।

बीज की मात्रा

7-8 किलोग्राम बीज एक हेक्टेयर के लिए पर्याप्त होता है।

बुआई की विधि

पंक्तियों की आपसी दूरी तीन मीटर और पौधों की आपसी दूरी 75-100 सें.मी. बीजों को 2.5 सें.मी. से अधिक गहरा न बोएं। बीज अंकुरित होने के बाद केवल दो स्वस्थ पौधे एक स्थान पर छोड़ें, शेष को उखाड़ दें।

सिंचाई

ग्रीष्मकालीन फसल के लिए 8-10 दिन के अंतर पर सिंचाई करें, जबकि वर्षाकालीन फसल की सिंचाई वर्षा पर निर्भर करती है।

तुड़ाई

कद्दू के फलों की तुड़ाई बाजार की मांग पर निर्भर करती है। आमतौर पर बोने के 75-90 दिन बाद हरे फल तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं। फल को किसी तेज चाकू से अलग करना चाहिए।

उपज

प्रति हेक्टेयर 250-400 क्विंटल तक उपज मिल जाती है।

भंडारण

प्रथम भंडारण 2-3 सप्ताह तक 29.22-52.00 डिग्री सेल्सियस तापमान पर भंडारण करें। फिर उसके उपरांत 75 प्रतिशत सापेक्ष आद्र्रता के साथ 24.22-29.22 डिग्री सेल्सियस तापमान पर भंडारण करना चाहिए।

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