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की दो पत्नियां ‘रिद्धि-सिद्धि’ और दो पुत्र ‘शुभ और लाभ’ हैं। गणेशजी के पुत्रों के नाम हम ‘स्वास्तिकÓ के दाएं-बाएं लिखते हैं। घर के मुख्य दरवाजे पर हम ‘स्वास्तिक’ मुख्य द्वार के ऊपर मध्य में और शुभ और लाभ बाईं तरफ लिखते हैं…

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ऐसा करने के पीछे एक पौराणिक मत है। हिंदू पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान गणेशजी को देवों में सर्वप्रथम पूज्य ‘बुद्धि का देवता’ माना जाता है। ‘स्वास्तिक’ बुद्धि को प्रस्तुत करने का पवित्र चिंह है। स्वास्तिक की दोनों अलग-अलग रेखाएं गणपति जी की पत्नी रिद्धि-सिद्धि को दर्शाती हैं। रिद्धि शब्द का अर्थ है ‘बुद्धि’ जिसे हिंदी में शुभ कहते हैं। ठीक इसी तरह सिद्धी इस शब्द का अर्थ होता है ‘आध्यात्मिक शक्ति’ की पूर्णता यानी ‘लाभ’। घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक, शुभ और लाभ इन्हीं शक्तियों को दर्शाते हैं। इसे हम इस तरह भी समझ
सकते हैं…

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गणेश (बुद्धि) + रिद्धि (ज्ञान) = शुभ।
गणेश (बुद्धि) + सिद्धि (आध्यात्मिक स्वतंत्रता) = लाभ। यही कारण है कि हमें घर के मुख्य द्वार पर शुभ और लाभ लिखना चाहिए, क्योंकि देवों में सर्वप्रथम पूज्य गणेश जी हैं। उनका पवित्र चिंह स्वास्तिक और शुभ लाभ घर के द्वार पर होने से घर में अच्छाइयों का प्रवेश होता है और बुराइयां आपके घर के अंदर प्रवेश नहीं करती हैं।

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