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ford electric cars

फिएस्टा मॉडल बंद करेगी कंपनी

15 महीनों में लगाया जाएगा संयंत्र

नई दिल्ली। फोर्ड जर्मनी में इलेक्ट्रिक कारों को 2023 के बाद बना सकती है, जब फोर्ड के फिएस्टा मॉडल को बंद किया जाएगा। कंपनी के प्रमुख ने जर्मनी के एक पेपर में कहा कि वह बदलाव का समर्थन करने के लिए राज्य सब्सिडी का स्वागत करेंगे। जर्मन बिजनेस डेली हैंडल्सब्लट की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी कोलोन में अपने संयंत्र को फिर से लगाने के लिए लगभग 15 महीनों का समय लेगी और अगर इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री सालाना 30,000 या 40,000 वाहनों की रहेगी तो यह निवेश के लायक नहीं है।

कंपनी के मुताबिक इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री अभी ज्यादा पावरफुल नहीं रहेगी। इसलिए आज की इलेक्ट्रिक कार उनके लिए फायदेमंद नहीं है। जर्मनी की प्रीमियम कार बनाने वाली कंपनी बीएमडब्ल्यू ने पिछले हफ्ते ही कहा था कि वह 2020 तक भारी मात्रा में इलेक्ट्रिक कारों को नहीं बनाएगी क्योंकि उनकी मौजूदा टेक्नोलॉजी प्रोडक्शन वॉल्यूम के मुकाबले पर्याप्त मात्रा में लाभ नहीं पहुंचा रही है।

फोर्ड-महिंद्रा मिलकर बनाएंगे एसयूवी, इलेक्ट्रिक कार

अमेरिका की कार निर्माता कंपनी फोर्ड 2022 तक इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 5 बिलियन डॉलर का निवेश करने जा रही है। इस दौरान कंपनी अगले पांच वर्षों में करीब 13 इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड मॉडल्स दुनियाभर में उतारेगी। कंपनी का लक्ष्य यूरोप में 2020 तक पहली फुली इलेक्ट्रिक व्हीकल को उतारना है। फोर्ड और महिंद्रा मिलकर अब भारत में एसयूवी और छोटी इलेक्ट्रिक गाडिय़ां तैयार करेंगी । इसके लिए दोनों कंपनियों के बीच वीरवार को एक एमओयू साइन हुआ।

दोनों कंपनियां भारत और दूसरे उभरते हुए मार्केट को फोकस करके गाडिय़ां डेवलप करेंगी। इसके अलावा दोनों कंपनियां कनेक्टिड कार सल्यूशंस पर भी मिलकर काम करेंगी। इस पार्टनरशिप में सबसे पहले फोर्ड और महिंद्रा एक मिड साइज की एसयूवी को बनाएंगे जिसको दोनों कंपनियां अपने-अपने ब्रैंड नेम के साथ बेचेंगी। जानकारी के लिए बता दें कि महिंद्रा अपने इंजन भी फोर्ड की गाडिय़ों के लिए सप्लाई करेगी। उसके बाद दोनों कंपनियां एक कॉम्पैक्ट एसयूवी और एक छोटी इलेक्ट्रिक कार बनाने पर भी काम करेंगे।

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