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murder case

अब 28 मार्च को होगी मामले की सुनवाई

कोटखाई गैंगरेप-मर्डर केस

  • बंद लिफाफे में पेश की स्टेटस रिपोर्ट
  • तीन माह में जांच पूरी करे जांच एजेंसी – हाईकोर्ट

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला
बहुचर्चित गुडिय़ा रेप और मर्डर केस में CBI के निदेशक की ओर से उनके निजी शपथ पत्र के साथ बुधवार को प्रदेश हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दायर की। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई के पश्चात CBI को तीन महीने में इस मामले की जांच पूरी करने के आदेश दिए हैं।

सुनवाई के दौरान CBI ने बंद लिफाफे में स्टेटस रिपोर्ट पेश की। स्टेटस रिपोर्ट के अवलोकन के पश्चात कोर्ट ने पाया की CBI सही दिशा में कार्य कर रही है और जांच पूरी करने के लिए मांगा गया समय दिया जाना जरूरी है। मामले पर अगली सुनवाई 28 मार्च को होगी। मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करने में असफल रही CBI ने हाईकोर्ट से तीन माह का वक्त मांगा है। CBI का दावा है कि आने वाले दिनों में बड़ा खुलासा होगा।

सभी आरोपी पुलिस वाले इन दिनों न्यायिक हिरासत में चल रहे हैं।

हाल ही में सीबीआई ने आरोपियों की सूचना देने वालों को 10 लाख रुपये का इनाम देने की भी घोषणा की थी, लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली। पिछले 6 माह से हलाईला सहित कोटखाई के जंगलों में मुख्य आरोपियों की तलाश में जुटी CBI को अभी तक कोई सुराग नहीं मिला। ऐसे में इस मामले की जांच को पूरे 9 माह लग सकते हैं। गौर है कि 6 माह पूर्व यानी चार जुलाई को गुडिय़ा स्कूल से जाने के बाद लापता हो गई थी। छह जुलाई की सुबह उसका शव महासू के समीप जंगल में मिला था। इसके बाद प्रदेश पुलिस की SIT ने भी राजू समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया था।

इनमें से एक आरोपी सूरज की पुलिस लॉकअप में हत्या हो गई थी और इसका आरोप भी इसी राजू पर लगा था। इसके बाद मामला CBI को चला गया था और उसकी जांच में SIT से आठ अफसर व कर्मचारी सूरज की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किए गए थे। इसी केस में पुलिस लॉकअप में हुई सूरज की हत्या केस में गत 16 नवंबर को शिमला के पूर्व एसपी डीडब्ल्यू नेगी को सीबीआई ने गिरफ्तार किया गया था। सभी आरोपी पुलिस वाले इन दिनों न्यायिक हिरासत में चल रहे हैं।

ज्यादा समय ले रही CBI

गुडिय़ा रेप और मर्डर केस में हाईकोर्ट ने पिछली बार CBI के निदेशक को निजी शपथ पत्र के माध्यम से स्टेटस रिपोर्ट दायर करने के आदेश दिए थे। पिछली स्टेटस रिपोर्ट के अवलोकन के पश्चात कोर्ट ने पाया था कि CBI इस मामले को सुलझाने में जरूरत से ज्यादा समय ले रही है। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कोर्ट को बताया था कि मामला एक ब्लाइंड मर्डर केस है इसलिए इस मामले की जांच अधिकांश वैज्ञानिक विश्लेषण पर निर्भर है।

सीबीआई ने कोर्ट बताया था कि हाल ही जांच में उनके हाथ कुछ नई लीड लगी है। अत: यह कहना उपयुक्त नहीं होगा कि यह मामला नहीं सुलझ सकता। कोर्ट ने सुनवाई के पश्चात आम लोगों से भी आग्रह किया था कि अगर गुडिय़ा मामले को सुलझाने से जुड़े किसी भी तथ्यों की जानकारी उनके पास है तो वह सीबीआई से साझा करें। इसी संदर्भ में राखी नामक महिला या लड़की ने जांच को लेकर कुछ सुझाव लिखित में पेश किए थे जिन्हें कोर्ट ने सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए।

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