एक साथ जली सगे भाईयों की चिताएं

हिमाचल दस्तक : अनुज कुमार। टाहलीवाल : बाथड़ी गांव के दो सगे भाई अपनी मां से वापिस घर लौटने पर खीर खाने का वायदा कर बालकरूपी मंदिर घूमने गए वापिस नहीं लौट पाए।

अपने हाथों से खीर खिला बच्चों का प्यार जताने का इच्छा मन में दबी रह गई। इतना ही नहीं जब लाड़लो का शव देखा, तो रोते-रोते भी बस एक ही शब्द निकला कि उठो मुंडयो में तुहाडे लिए खीर बनाई है खा लो। दोनों बेटे शुक्रवार को घर से जाने से पहले अपनी मां को बोल कर गए थे कि मां खीर बना के रखना हम वापिस आकर खा लेंगे, लेकिन मां को क्या मालूम कि उसके दोनों बेटे वापिस कभी भी लौट कर नही आएंगे।
उस घर मे अब न तो कभी मां शब्द सुनाई देगा और न ही उनकी बहन को राखी बांधने के लिए कभी भाइयो की कलाई मिलेगी। जिस पिता ने अपने बेटों के लिए सपने संजोए थे, उन्हीं बेटो की अर्थी को उसे आज कंधा देना पड़ा। एक ही परिवार के दो बेटों के शव जैसे ही रविवार सुबह घर पहुंचे तो पूरा गांव ही दोनों युवको के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। दोनो भाईयो की अंतिम विदाई के समय बच्चों से लेकर बुढ़ो तक हर किसी की आंखे नम थी। गांववासियो ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
बता दें कि शुक्रवार सुबह बाथड़ी के रहने बाले रमेश कुमार और राज कुमारी के दोनों बेटे अरुण कुमार और राहुल मैहतपुर के साथ लगते गांव बनगढ़ में रह रहे अपने मामा के साथ जिला कांगड़ा के बालकरूपी मन्दिर में माथा टेकने गए थे। शनिवार को सुबह करीब 6 बजे जैसे ही दोनों भाई न्यूगल खड्ड पर बने पुल के पास नहाने लगे तो एक भाई का संतुलन बिगड़ गया और वह पानी मे जा गिरा। अपने भाई को डूबता देख दूसरे ने भी पानी मे छलांग लगा दी और दोनों ही भाई गहरे पानी मे डूब गए और सदा के लिए इस संसार को अलविदा कह गए।
मृतकों के पिता रमेश कुमार टाहलीवाल के उद्योग और माता राज कुमारी बाथड़ी के एक उद्योग में काम करती है। जबकि मृतक अरुण कुमार ने इंजीनिरिंग की हुई थी और वह बद्दी के एक उद्योग में काम करता था। जबकी मृतक राहुल नवांशहर से आइलेट्स कर रहा था। 4 महीने पहले ही इनकी बड़ी बहन का विवाह हुआ था। रविवार सुबह बाथड़ी गांव में दोनो सगे भाईयों की एक साथ चिताएं जली।
–अनुज कुमार, टाहलीवाल। 

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