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Manuscript

Manuscript : नई दिल्ली:  संसद की एक समिति ने राष्ट्रीय पांडुलिपि संरक्षण मिशन को लेकर सरकार को लताड़ लगाते हुए कहा है कि वह इस पर पूरा ध्यान नहीं दे रही है तथा इसे लागू करने के मामले में नेतृत्व क्षमता का परिचय नहीं दे रही है।

राष्ट्रीय पांडुलिपि संरक्षण मिशन का गठन केन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय के तहत वर्ष 2003 में किया गया था। यह अपने आप में एक अनूठा मिशन है क्योंकि इसके जिम्मे भारत की अनुमानित एक करोड़ पांडुलिपियों के संरक्षण का दायित्व दिया गया है। माना जाता है कि पांडुलिपि के मामले में विश्व में भारत के पास सबसे बड़ा खजाना है। तृणमूल कांग्रेस नेता डेरेक ओब्रायन की अध्यक्षता वाली संस्कृति मंत्रालय से संबंधित संसद की स्थाई समिति ने इस सप्ताह दोनों सदनों के पटल पर पेश अपनी रिपोर्ट में राष्ट्रीय पांडुलिपि संरक्षण मिशन को लेकर सरकार पर यह टिप्पणी की है। संस्कृति मंत्रालय की अनुदान की मांगों (2018-19) पर स्थाई समिति की यह 258वीं रिपोर्ट है।
इस रिपोर्ट में कहा गया, समिति गौर करती है कि राष्ट्रीय पांडुलिपि संरक्षण मिशन पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। इसमें कहा गया कि 2017-18 के बजट अनुमान में 12 करोड़ रूपए का बजट आवंटित किया गया था किंतु इसी वर्ष के संशोधित अनुमानों में इसे घटाकर महज 5.50 करोड़ रूपए कर दिया गया। समिति ने कहा कि इसमें से भी कितना धन व्यय किया गया, इस बारे में उसे जानकारी नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार समिति को सूचित किया गया कि आवंटन में कमी का कारण 18 शैक्षणिक पदों में से 16 का भरा नहीं जाना है।
इसमें कहा गया, समिति का मानना है कि मंत्रालय (संस्कृति) द्वारा दिया गया कारण सहीं नहीं ठहराया जा सकता। मंत्रालय मिशन को लागू करने में किसी नेतृत्व क्षमता का परिचय नहीं दे रहा है। समिति ने कहा कि कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी आवश्यक कर्मियों की नियुक्ति के प्रयास होने चाहिए।
रिपोर्ट में कलाकार पेंशन योजना एवं कल्याण कोष का समुचित उपयोग नहीं होने पर चिंता जताई गई है। समिति के अनुसार संस्कृति मंत्रालय ने उसे लिखित जवाब में सूचित किया कि 12वीं पंचवर्षीय योजना के अंत तक कलाकार पेंशन योजना एवं कल्याण कोष को जारी रखने के लिए की गई समीक्षा के बाद इसका 28 सितंबर 2017 से नाम बदलकर कलाकारों को पेंशन एवं चिकित्सा सहायता योजना कर दिया गया। इसमें कहा गया कि तत्कालीन कलाकार पेंशन योजना एवं कल्याण कोष के राष्ट्रीय कलाकार कल्याण कोष के लिए अलग से कोई धन नहीं दिया गया। कलाकार पेंशन योजना एवं कल्याण कोष के तहत पेंशन वितरित करने के लिए एलआईसी को सेवा प्रदाता बनाया गया।
कलाकार पेंशन योजना एवं कल्याण कोष के तहत वर्ष 2014-15, 2015-16 तथा 2016-17 में क्रमश 17 करोड़, 18.45 करोड़ और 13.17 करोड़ रूपए आवंटित किए गए। इस अवधि में एलआई द्वारा क्रमश: 15.63 करोड़, 13.86 करोड़ और 13.17 करोड़ रूपए ही उपयोग किए गए। रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले तीन सालों से इस योजना के लिए आवंटित किए गए धन का उपयोग नहीं किया गया। समिति ने सरकार से कहा कि वह इस धन को पूरी तरह से खर्च नहीं किए जाने के कारणों से उसे अवगत कराए।

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