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Construction of Metro shed project in Aarey Colony is not being stopped: Court

नई दिल्ली :  उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि मुंबई के प्रमुख हरित क्षेत्र आरे कालोनी में मेट्रो की शेड परियोजना निर्माण पर रोक नहीं है। आरे कालोनी में पेड़ों की कटाई के विरूद्ध जबर्दस्त विरोध-प्रदर्शन हुआ था। न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ  ने बृहन्नमुंबई नगर निगम की आरे कालोनी में वृक्षों की कटाई, वृक्षारोपण और वृक्षों को अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने की तस्वीरों के साथ स्थिति रिपोर्ट मांगी है।

बृहन्न मुंबई नगर निगम की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को आश्वासन दिया कि आरे कालोनी में अब और वृक्षों
की कटाई नहीं हो रही है और शीर्ष अदालत के पहले के आदेश के अनुरूप पूरी तरह से यथास्थिति बनाए रखी जा रही है। शीर्ष अदालत ने सात अक्टूबर को कानून के छात्र के पत्र को जनहित याचिका में तब्दील करते हुए आरे कालोनी में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था।
पीठ ने आरे कालोनी में वृक्षों की कटाई के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश की अवधि बढ़ाते हुए कहा कि इस मामले में अब नवंबर में आगे सुनवाई की जाएगी।

शीर्ष अदालत ने वृक्षों की कटाई पर रोक लगाने के लिए कानून के छात्र रिशव रंजन द्वारा प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई को भेजे गए पत्र को जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था। बंबई उच्च न्यायालय ने चार अक्टूबर को आरे कालोनी को वन घोषित करने और इस हरित क्षेत्र में मेट्रो कार शेड के निर्माण के लिए 2600 से अधिक वृक्षों की कटाई की अनुमति देने का मुंबई नगर निगम का फैसला निरस्त करने
से इंकार कर दिया था।

प्रधान न्यायाधीश को लिखे गए पत्र में कानून के छात्र ने कहा था कि मुंबई के प्राधिकारी मीठी नदी के किनारे मुंबई के स्वच्छ हवा के मुख्य स्रोत आरे कालोनी में वृक्षों की कटाई कर रहे हैं और प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक 1500 वृक्ष काटे जा चुके हैं। पत्र में यह भी कहा गया था कि यही नहीं, ग्रेटर मुंबई नगर निगम और मुंबई मेट्रो रेल कार्पाेरेशन की गतिविधियों की शांतिपूर्ण तरीके से चौकसी करने वालों को प्रशासन ने जेल में डाल दिया।

पत्र के अनुसार आरे वन संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान से सटा हुआ है और इसमें पांच लाख वृक्ष हैं। मुंबई मेट्रो-3 परियोजना और विशेषकर
कार शेड के निर्माण के लिए वृक्षों की कटाई करने का प्रस्ताव है। पत्र में कहा गया था कि उच्च न्यायालय ने आरे को वन मानने
या इसे पारिस्थितिकी की दृष्टि से संवेदनशील घोषित करने से इंकार कर दिया है।

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