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गुडग़ांव में आज भी जारी है 100 साल पुरानी प्रथा

गुडग़ांव
शहर में पब या बार खोलने का लाइसेंस लेने के लिए इलाके में ढोल बजाना पड़ता है। यह नियम आज का नहीं बल्कि सौ साल से भी पुराना है। नियम के तहत इलाके में ढोल बजवाकर लोगों को इसकी जानकारी दी जाती है कि उनके आसपास पब या बार खोला जाएगा। अगर किसी को आपत्ति है तो वह जरूर दर्ज कराए।

लाइसेंस के लिए अब ढोल तो नहीं बजवाया जाता, लेकिन एक्साइज डिपार्टमेंट को दी फाइल में बाकायदा ढोल व रिक्शे का बिल लगा दिया जाता है। गुडग़ांव के ईस्ट जोन में 189 व वेस्ट जोन में 89 पब और बार हैं। जबकि शहर में 37 माइक्रो ब्रेवरी यानी बीयर बार हैं। 2 ब्रेवरी रेवाड़ी में हैं। इन सभी की फाइल में ढोल बजाकर पब और बार खोलने की जानकारी के बिल लगे हैं।

डिप्टी एक्साइज एंड टैक्सेशन ऑफिसर एचसी दहिया ने बताया कि पंजाब एक्साइज एक्ट 1914 के तहत पब और बार के लाइसेंस से पहले उस एरिया में ढोल बजाकर मुनादी करवानी होती है, जहां पर पब और बार खुलना है। किसी को अगर आपत्ति है तो वह इस जानकारी के मिलने के बाद दर्ज करवाए।

बुक करना पड़ता है ढोली

एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग आज भी पंजाब एक्साइज एक्ट 1914 के नियमों के तहत काम कर रहा है। एक्ट के तहत एक नियम है कि अगर आपने पब और बार के लाइसेंस के लिए विभाग में अप्लाई किया है तो इसके लिए आपको एक ढोल वाला बुक करना होगा। इसके बाद इस ढोल वाले को रिक्शा में बैठाकर उस एरिया में मुनादी करनी होती है, जहां पर पर पब और बार खोला जाना है।

इसके बाद विभाग में लाइसेंस के लिए जो फाइल जमा करवानी होती है, उसमें ढोल और रिक्शा वाले के बिल के अलावा उस एरिया की सारी जानकारी दी जाती है, जहां पर मुनादी करवाई है। हालांकि यह सब कुछ होता नहीं है, लेकिन इसके बिल जरूर लगते हैं।

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