News Flash
confirm your seat

कैसे निश्चित कर सकते हैं अपनी उम्मीदवारी, आइए जानते हैं…

नौकरी हासिल करनी हो या मैनेजमेंट संस्थानों में दाखिला, ग्रुप डिस्कशन और पर्सनल इंटरव्यू सिलेक्शन प्रोसेस का अहम हिस्सा बन चुके हैं। उम्मीदवारों के संपूर्ण व्यक्तित्व को परखने के लिए अब संस्थान लिखित परीक्षा तक सीमित नहीं रहते। कैसे निश्चित कर सकते हैं अपनी उम्मीदवारी, आइए जानते हैं…

क्यों महत्वपूर्ण है जीडी/पीआई

इन दोनों परीक्षाओं का मकसद उम्मीदवार के संपूर्ण व्यक्तित्व को समझना होता है। उम्मीदवार में प्रबंधन के गुणों को परखा जाता है। लिखित परीक्षा में जहां कोर्स विशेष की बुनियादी समझ को परखा जाता है, वहीं जीडी और पीआई में उम्मीदवार के निर्णय लेने की क्षमता, दबाव में बेहतर प्रदर्शन का कौशल, विश्लेषणात्मक और तार्किक क्षमता को आंका जाता है।

किसी भी उम्मीदवार की पर्सनैलिटी का आकलन करने के कई तरीके होते हैं, लेकिन जीडी और पीआई जैसे टूल्स से उम्मीदवार को सीमित समय में जांचना संभव हो पाता है। इस प्रक्रिया में यह जांचने की कोशिश की जाती है कि जिस कोर्स के लिए उम्मीदवार दाखिला लेने वाला है या नौकरी के दौरान जिन जिम्मेदारियों का निर्वहन करना है, उसके लिए उसकी पर्सनैलिटी कितनी उपयुक्त है और उसे कितना पॉलिश करना होगा।

ग्रुप डिस्कशन

ग्रुप डिस्कशन सामान्यत: 20 से 30 मिनट का होता है। इसका मकसद उम्मीदवार की टीम के तौर पर काम करने की क्षमता को परखना है। अमूमन ऐसे टॉपिक्स पैनल द्वारा चुने जाते हैं, जो उम्मीदवार की पर्सनैलिटी को सामने लाने में मदद करते हैं। जीडी में अधिकतर सेमी-सर्कल में बैठा जाता है और टॉपिक पर बातचीत की जाती है। सामान्य तौर पर टॉपिक इस प्रकार हो सकते हैं जैसे कि ‘वुमेन मेक बेटर मैनेजर’ और ‘इंडो-यूएस न्यूक्लियर डील’।

ग्रुप डिस्कशन में सबसे प्रमुख होता है कि इसके बारे में आप सोचते क्या हैं, टॉपिक को विश्लेषित करने में आप कितने निपुण हैं, सम-सामयिक जानकारियों से आप कितने अपडेट हैं और किस तरह आप टॉपिक को प्रस्तुत करते हैं। समूह में एक व्यक्ति से टॉपिक के बारे में बताने को कहा जाता है, उसके बाद डिस्कशन और निष्कर्ष आता है। सबसे अधिक फोकस लीडरशिप और निर्णय लेने की क्षमता का होता है। जीडी में ऐसे टॉपिक दिए जाते हैं, जिन पर बहस की जा सकती है।

क्या करें

-विषय को ध्यान से सुनें, साथ ही पैनल के मकसद को समझने की कोशिश भी करें।
-विषय की अच्छी समझ रखते हैं, तो डिस्कशन की शुरुआत कर सकते हैं।
-विषय के बारे में नहीं जानने पर दूसरों को ध्यान से सुनें।
-अपने प्वाइंट को तथ्यों और आंकड़ों के साथ रखें।
-अन्य लोगों को भी बोलने का मौका दें।
-शालीनता बरतें और पूरे आत्मविश्वास से बोलें।
-असहमत होने पर, पूरी विनम्रता से अपनी बात रखें।
-अगर समूह किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा है, तो डिस्कशन का सार निकालें।

Comments

Coming soon

Career Counsling

Get free career counsling and pursue your dreams