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भारत देश के बच्चे कई सारे फील्ड्स में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं

कितने पेरेंट्स और टीचर्स ऐसे होंगे, जो बच्चों की पसंद-नापसंद जानने और फिर उनके मुताबिक उन्हें निखारने-संवारने की कोशिश करते हैं? खोजने पर ऐसे गिने-चुने ही मिलेंगे, जो वास्तव में उनके इंट्रेस्ट को समझकर उनके मुताबिक उन्हें सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध करवाने का प्रयास करते हैं…

महानगरों से लेकर छोटे-बड़े शहरों और यहां तक कि कस्बों और गांवों तक बाल प्रतिभाएं हर जगह हैं, पर गार्जियस में जागरूकता की कमी और बुनियादी सुविधाएं न होने से इन प्रतिभाओं को आगे बढऩे की सही दिशा नहीं मिल पाती।

ज्यादातर स्कूलों में बच्चों को तोता-रटंत शिक्षा ही दी जाती है और जब कोई बच्चा बहुत-कुछ रट लेता है, तो दूसरों के सामने उसका प्रदर्शन कराकर गार्जियन खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं। पर क्या उन्होंने और स्कूल-टीचर्स ने कभी यह सोचा है कि इससे उस बच्चे के नेचुरल टेलेंट का कितना भला हो रहा है?

महानगरों से लेकर छोटे-बड़े शहरों और यहां तक कि कस्बों और गांवों तक बाल प्रतिभाएं हर जगह हैं, पर गार्जियस में जागरूकता की कमी और बुनियादी सुविधाएं न होने से इन प्रतिभाओं को आगे बढऩे की सही दिशा नहीं मिल पाती। भारत देश के बच्चे कई सारे फील्ड्स में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।

देश के ग्रामीण-शहरी सभी बच्चों के स्वाभाविक विकास के लिए कितने कारगर कदम उठाए गए?

चाहे वह स्टडी हो या स्पोट्र्स या फिर सिंगिंग से लेकर एक्टिंग का मामला ही क्यों न हो, लेकिन देश के लिए सिर्फ इतना ही पर्याप्त नहीं कहा जा सकता। इसका खामियाजा यह होता है कि बचपन में ही ज्यादातर बच्चों के ख्वाब बिखर जाते हैं। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिन पर हम हर साल 14 नवंबर को बाल दिवस मनाकर रस्म अदायगी तो कर लेते हैं, लेकिन क्या हम सभी ने कभी यह सोचने की जहमत उठाई है कि देश के ग्रामीण-शहरी सभी बच्चों के स्वाभाविक विकास के लिए कितने कारगर कदम उठाए गए?

क्या सभी बच्चों को स्कूल की सुविधा मिल पा रही है और जिनको मिल भी रही है, क्या वहां उनके नेचुरल टेलेंट को पहचानने और निखारने की कोई कोशिश की जाती है? अगर आपका बच्चा अपनी पसंद के किसी खेल, म्यूजिक, आर्ट, डांस, राइटिंग में लाजवाब प्रदर्शन करता है, तो क्या इससे आपका नाम रोशन नहीं होगा? तो फिर क्यों बच्चे पर अपनी पसंद थोपकर या दूसरों की तरह बनने का दबाव डालकर खुद उसके बचपन को खत्म करने पर आमादा हैं। उसकी खुशी को समझकर ही कदम बढ़ाएं, ताकि आप भी हमेशा खुश रह सकें।

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