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अक्सर हम करियर काउंसलिंग का समय पहचानने में देरी कर देते हैं

जब बच्चे आगे की राह चुनने की दहलीज पर होते हैं। इसे आप हाई स्कूल (सेकेंडरी) ही मानिए, क्योंकि इसके बाद ही स्टूडेंट्स के लिए स्ट्रीम चेंज करने का समय होता है और यही वह समय है, जब उन्हें प्रॉपर गाइडेंस की जरूरत होती है। पैरेंट्स को इसी फेज में बच्चों को करियर संबंधी गाइडेंस प्रोवाइड करवानी चाहिए। इससे उसे सही सब्जेक्ट चुनने में मदद मिलती है, बल्कि वह यह भी जान पाता है कि किन विषयों में वाकई उसका रूझान है…

प्रोफेशनल काउंसलर मनोवैज्ञानिक तरीके से छात्र से बातचीत करते हैं और मनोवैज्ञानिक या साइकोमेट्रिक टेस्ट के आधार पर स्टूडेंट के टैलेंट को समझते हैं।

अक्सर हम करियर काउंसलिंग का समय पहचानने में देरी कर देते हैं। दरअसल, करियर काउंसलिंग का सही समय वह है, अगर 11वीं में सही सब्जेक्ट का चुनाव न किया, तो पूरा करियर ही यू-टर्न ले सकता है। पैरेंट्स को बच्चे की पढ़ाई पर ध्यान तो देना ही चाहिए, जरूरत उन्हें यह समझने की भी है कि बच्चे की रुचि किन सब्जेक्ट्स में है और वह उनमें कैसा कर रहा है!

यह कतई जरूरी नहीं है कि साइंस में 90 या 100 फीसदी अंक लाने वाला छात्र साइंस स्ट्रीम ही पसंद करे

यह भी देखना चाहिए कि किन विषयों को पढऩे में बच्चे का मन नहीं लगता। इसके बाद अभिभावक करियर के चुनाव में बच्चे की मदद कर सकते हैं। लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पैरेंट्स बच्चों के लिए कितना वक्त निकाल पाते हैं, यह सबको मालूम है। बच्चे का रिजल्ट भले पैरेंट्स को पता हो, लेकिन वे अक्सर उसकी पसंद को समझने में चूक जाते हैं। सिर्फ किसी सब्जेक्ट में अच्छे नंबर लाना उस सब्जेक्ट में बच्चे के आगे बेहतर करने की गारंटी नहीं है।

पैरेंट्स के लिए इस बात को समझना जरूरी है। इंजीनियरिंग-मेडिकल जैसे क्षेत्रों के प्रति क्रेज का ही यह नतीजा है कि मन मुताबिक पढ़ाई न कर पाने की वजह से बच्चे तनाव में घिर रहे हैं। यहीं पर बच्चों यानी स्टूडेंट्स को काउंसलिंग की जरूरत होती है, ताकि उनके पैरेंट्स उनकी प्रतिभा को पहचान सकंे और उसे अपनी पसंद के रास्ते पर बढऩे की इजाजत दे सकें। यह कतई जरूरी नहीं है कि साइंस में 90 या 100 फीसदी अंक लाने वाला छात्र साइंस स्ट्रीम ही पसंद करे।

आज मैनेजमेंट में कई नए सब्जेक्ट आ गए हैं।

हो सकता है उसकी रुचि गणित में न हो, क्योंकि 10वीं के बाद पढ़ाई का लेवल अचानक हाई हो जाता है और अगर स्टूडेंट की रुचि उसमें न हो, तो उसका प्रदर्शन प्रभावित होने लगता है। काउंसलिंग में इन्हीं बातों को पैरेंट्स को समझाने की कोशिश की जाती है। नए क्षेत्रों की जानकारी काउंसलिंग का एक सबसे बड़ा फायदा यह भी है कि काउंसलर आपको वैसे सब्जेक्ट या उभरते क्षेत्रों के बारे में भी बताते हैं, जिनसे आप अनजान होते हैं।

काउंसलर आपको मार्केट ट्रेंड (देश-विदेश) के बारे में बताते हैं और इन सबसे ऊपर आपको अच्छा इंस्टीट्यूट चुनने में मदद करते हैं। सब्जेक्ट पसंद का होने से आप अपनी पसंद की राह पर बढ़ तो सकते हैं, लेकिन इस गलाकाट प्रतियोगिता के जमाने में अच्छे इंस्टीट्यूट का चुनाव करके ही आप दूसरों पर बढ़त ले सकते हैं। आज मैनेजमेंट में कई नए सब्जेक्ट आ गए हैं। इसी तरह लॉ का क्षेत्र बढ़ गया है। फैशन टेक्नोलॉजी का बुखार और खुमार तो है ही, खेल के क्षेत्र में हो रहे सुधार और कमाई से इस क्षेत्र में क्रिकेट के अलावा नए ऑप्शन पर भी उभरे हैं। एक काउंसलर की सलाह यहीं कारगर होती है।

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