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जल्दबाजी या गलत निर्णय से करियर का ग्राफ मनमाफिक तरीके से चढ़ नहीं पाता

देश में अधिकतर युवा ऐसे पेशे में आ जाते हैं, जिसके अनुरूप उनकी स्किल नहीं होती। कई बार युवा एक क्षेत्र में सर्टिफिकेट और डिग्री की बाढ़-सी लगा देते हैं, पर उनकी स्किल रट्ट की तरह होती है। ऐसे में स्किल को मांझना सबसे आवश्यक है। इसमें प्रैक्टिकल अनुभव उत्प्रेरक का काम करता है। जहां तक शिक्षा की बात है तो वह विषय की बुनियादी समझ देती है और वर्क एक्सपीरियंस प्रायोगिक अनुभव…

अधिकतर छात्रों में उच्च शिक्षा की तरफ जाने से पहले यह संशय रहता है कि क्या उन्हें उच्च शिक्षा से फायदा होगा या इंडस्ट्री में काम कर वह अपनी पैठ अधिक मजबूत कर सकते हैं। अक्सर इस उलझन में फंस कर छात्र गलत फैसला ले बैठते हैं, चूंकि यह करियर का सबसे अहम दौर होता है, ऐसे में जल्दबाजी या गलत निर्णय से करियर का ग्राफ मनमाफिक तरीके से चढ़ नहीं पाता।

उच्च शिक्षा के फायदे

– चीजों की बुनियादी समझ होती है और काम में कम परेशानी आती है।
– किसी कंपनी में इंटरव्यू के लिए पहली योग्यता क्वालिफिकेशन है। ऐसे में कंपनियों के दरवाजे खोलने की चाबी पढ़ाई है।

हाल में आए एक सर्वे के अनुसार भारत में दस में से नौ कर्मी नौकरी को सुरक्षित रखने की दिशा में शिक्षा से अधिक अनुभव को महत्त्व देते हैं। उनकी नजर में करियर में ऊंची उड़ान भरने के लिए केवल डिग्री का होना काफी नहीं है। हालांकि एचआर एक्सपर्ट इस संबंध में संतुलित सोच अपनाने पर जोर देते हैं। उनके अनुसार भारत विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से गुणवत्ता की ओर कदम बढ़ा रहा है, ऐसे में उन उम्मीदवारों की मांग ज्यादा होगी, जिनके पास शिक्षा और प्रशिक्षण दोनों हों।

समय

कई बार यह देखने में आता है कि लोग उच्च शिक्षा के लिए अपनी नौकरी छोड़ देते हैं, पर वो इस बात का फैसला करने में चूक जाते हैं कि नौकरी छोड़ पढ़ाई शुरू करने का सही वक्त है या नहीं। आपको इस बात के प्रति आश्वस्त और जानकारी होना आवश्यक है कि वर्क एक्सपीरियंस से फायदा होगा या शिक्षा से।

अगर फैसला गलत समय पर लिया गया तो बाद में यह परेशानी का कारण बन सकती है। पढ़ाई के लिए काम छोडऩे से पहले यह जानना बहुत आवश्यक है कि मैंने उस काम का अनुभव उतना एकत्र कर लिया है, जितना पढ़ाई के लिए जरूरी है। मोटे तौर पर कहें तो काम के द्वारा फाउंडेशन मजबूत कर लेनी चाहिए।

ट्रेंड से लगातार वाकिफ होते रहें

पढ़ाई के दौरान भी आपको ट्रेंड से वाकिफ होते रहना आवश्यक है। नेशनल ऑक्यूपेशन इंडेक्स के मुताबिक नब्बे प्रतिशत लोग नौकरी में स्किल की वजह से कामयाब होते हैं, जबकि दस प्रतिशत लोग पढ़ाई की वजह से आते हैं। ऐसे में यह स्पष्ट है कि नौकरी के लिए स्किल सबसे अहम है। इसलिए पढ़ाई के साथ प्रायोगिक अनुभव आवश्यक है। जरूरी है कि आप जो पढ़ाई में सीखें उसका प्रायोगिक अनुभव जरूर करें। मौजूदा समय में वर्क एक्सपीरियंस वालों की मांग अधिक बढ़ी है। काम करके आप इसका निर्णय कर सकते हैं कि मुझे किस क्षेत्र में पढ़ाई करनी है और क्या मेरा एप्टीटयूड उस क्षेत्र के अनुरूप है।

प्रबंधन पाठ्यक्रमों में है अनुभव की मांग

प्रबंधन के क्षेत्र में वर्क एक्सपीरियंस वालों को वरीयता दी जाती है। यहां पर अनुभवी लोगों के लिए कोर्स भी उपलब्ध है।

एक वर्ष (एग्जीक्यूटिव एमबीए) का फुल टाइम एमबीए प्रोगाम

पिछले पांच सालों में भारत में एक वर्षीय एमबीए का स्कोप तेजी से बढ़ा है। प्रतिष्ठित संस्थान इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस तीन वर्ष से ज्यादा वर्क एक्सपीरियंस वालों को एक वर्ष के प्रोगाम में दाखिला देता है। कुछ आईआईएम रेगुलर पोस्ट ग्रेजुएट प्रोगाम कोर्स के अलावा वर्क एक्सपीरियंस वालों को एक वर्ष के प्रोगाम भी करवाते हैं।

तीन वर्ष के पार्ट टाइम प्रोगाम

यह प्रोगाम ऐसे वर्किंग प्रोफेशनल के लिहाज से तैयार किया गया है, जो कि फुल टाइम एमबीए कोर्स करने में सक्षम नहीं है। इसको करने की न्यूनतम योग्यता दो वर्ष है।

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