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संस्थान

आपको 12वीं में चाहे कितने ही अच्छे अंक क्यों न मिले हों, लेकिन अगर आईआईटी या एनआईटी में दाखिला नहीं मिल पाता, तो सही इंजीनियरिंग कॉलेज का चुनाव करना मुश्किल हो जाता है क्योंकि मार्केट में आए दिन नए प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज खुल रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप पहले खुद को काउंसलिंग के लिए तैयार करें। रैंक के अनुसार, अपनी प्राथमिकताएं तय कर लें…

आईआईटी में स्टूडेंट्स को काउंसलिंग के दौरान ही इंजीनियरिंग की विभिन्न ब्रांचेज की जानकारी दे दी जाती है। इसके बाद स्टूडेंट्स पर निर्भर करता है कि वे अपने एप्टीट्यूड, रोजगार के अवसर और इंडस्ट्री की डिमांड को देखते हुए कोई स्ट्रीम चुनें।

क्या चेक करें?

-जहां एडमिशन लेने जा रहे हैं, वहां संचालित कोर्स एआईसीटीई या संबंधित रेगुलेटरी बॉडी से मान्यता प्राप्त है या नहीं? अगर मान्यता प्राप्त है, तो उसकी अवधि कब तक है? इस बारे में रेगुलेटरी बॉडी की साइट पर जाकर चेक कर सकते हैं।

-संस्था और डिपार्टमेंट की वेबसाइट है कि नहीं? अगर नहीं है या उस पर पूरी इन्फॉर्मेशन नहीं दी गई है, तो वहां एडमिशन लेने का रिस्क न लें।

-वहां फैकल्टी का स्तर क्या है? फुलटाइम फैकल्टी मेंबर्स की संख्या का पता करें। स्टूडेंट-फैकल्टी रेशियो की जानकारी भी जरूर हासिल करें। यह भी देखें कि फैकल्टी कितनी अपडेटेड है और उसका इंडस्ट्री से कितना इंटरैक्शन होता है।

-फैकल्टी की क्वॉलिफिकेशन के बारे में जानकारी रखें। कितने एमटेक या पीएचडी हैं? उन्होंने पीएचडी कहां से की है, यह जानना अच्छा रहेगा। ज्यादातर अच्छे संस्थानों में पीएचडी होल्डर ही फैकल्टी मेंबर होते हैं।

-अगर किसी कॉलेज में फैकल्टी मेंबर की क्वॉलिफिकेशन बीटेक या एमसीए से ज्यादा नहीं है, तो वहां जाना सही नहीं रहेगा। वैसे अधिकांश प्राइवेट इंस्टीट्यूट्स में वहीं से पासआउट स्टूडेंट्स को पढ़ाने की जिम्मेदारी सौंप दी जाती है। इसके बारे में जरूर पता कर लें।

-कॉलेज के कितने स्टूडेंट्स हायर टेक्निकल स्टडीज के लिए जाते हैं, इसकी भी जानकारी रखें।

-हर एक डिपार्टमेंट के रिसर्च आउटपुट और इंडस्ट्री इंटरैक्शन पर भी ध्यान दें।

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