scholarship top university

हाल के दिनों में स्कॉलरशिप का सहारा ले विदेश जाकर पढऩे वाले स्टूडेंट्स की तादाद काफी बढ़ी है

देश में लाखों विद्यार्थी हैं जिनमें टैलेंट तो है, लेकिन पैसों की कमी के कारण वे देश-विदेश के अच्छे शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई करने का सपना साकार नहीं कर पाते। ऐसे मेधावी छात्रों के लिए स्कॉलरशिप एक अच्छा विकल्प है। स्कॉलरशिप पाकर वे वल्र्ड की टॉप यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर सकते हैं…

हाल के दिनों में स्कॉलरशिप का सहारा ले विदेश जाकर पढऩे वाले स्टूडेंट्स की तादाद काफी बढ़ी है। अधिकतर भारतीय छात्र पढ़ाई के लिए अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, जापान और सिंगापुर जैसे देशों में जाते हैं। विदेशी शिक्षण संस्थानों से पढ़ाई करने का मकसद केवल डिग्री लेना नहीं है, बल्कि वहां मिले एक्सपोजर से करियर को ऊंचे मुकाम तक पहुंचाना है। इन्हें बड़ी कंपनियां हायर करती हैं।

स्ट्रीम के हिसाब से देश का चयन

विदेश में पढ़ाई का मौका आपको बेहतर चांस दिला सकता है, लेकिन इसके लिए यह जानना जरूरी है कि किस देश में कौन-सी स्ट्रीम की पढ़ाई अच्छी है। उदाहरण के तौर पर अमेरिका इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी की पढ़ाई के लिए बेहतर है, तो ब्रिटेन में रिसर्च स्टडीज और लॉ की पढ़ाई करके नाम और मोटी सैलरी कमा सकते हैं।

सिंगापुर हॉस्पिटैलिटी और टूरिज्म के लिए फेमस है, तो ऑस्ट्रेलिया में होटल मैनेजमेंट और एन्वॉयरनमेंटल स्टडीज ज्यादा प्रसिद्ध है। वहीं डेंटल स्टडीज में चीन का कोई जवाब नहीं है। टेक्निकल एजुकेशन के बेस्ट कैंपस जर्मनी में हैं। इसके साथ ट्रेडिशनल कोर्सेज के लिए अमेरिका, कनाडा और यूके काफी पॉपुलर हैं।

12वीं पास करने के बाद जाएं विदेश

वैसे तो छात्र 10वीं पास करने के बाद ही आगे की पढ़ाई के लिए विदेश का रुख कर सकते हैं। लेकिन ऐसा करने से उन्हें आगे की पढ़ाई में परेशानी आ सकती है। क्योंकि अमेरिका सहित अधिकतर पश्चिमी देशों में भारत की तरह 10वीं और 12वीं कक्षा में बोर्ड की परीक्षा नहीं होती है। वहां हाई स्कूल 12वीं कक्षा तक की होती है और इसमें छात्रों को ग्रेड मिलता है। ऐसे में 10वीं करके गए भारतीय छात्रों को वांछित ग्रेड लाने और कोर्स पूरा करने में काफी दिक्कत आती है। इसलिए 12वीं के बाद पढ़ाई के लिए विदेश जाना अधिक फायदेमंद है। 12वीं के बाद छात्रों को ऐसी कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है।

एडमिशन के लिए एग्जाम पर फोकस

विदेशी विश्वविद्यालयों में एडमिशन के लिए कई तरह के टेस्ट होते हैं। इन टेस्ट को पास करने के बाद ही एडमिशन का दरवाजा खुलता है। हर स्ट्रीम के लिए अलग-अलग एग्जाम देने होते हैं। ज्यादातर देश टॉफेल और आईएलटीएस के स्कोर को ही वरीयता देते हैं।

यह भी पढ़ें – रोहित के घर गूंजी किलकारी

Comments

Coming soon

Career Counsling

Get free career counsling and pursue your dreams