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 बागवानी, कृषि व ग्रामीण विकास विभाग होंगे नोडल एजेंसी , प्रोजेक्ट पर अलग अलग विभागों की तय होगी जवाबदेही

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला : प्रदेश में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को प्रभावी तरीके से शुरू करने के लिए अब सिंगल अंब्रेला प्रक्रिया लागू होगी। इसमें बागवानी, कृषि, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज और वन विभाग को सिंगल अंब्रेला के तहत काम करना होगा।

प्रदेश सरकार ने इसके लिए प्रस्ताव भी तैयार कर दिया है। सिंगल अंब्रेला प्रक्रिया लागू होने से अलग-अलग विभागों की जवाबदेही होगी। साल दर साल ग्लोबल वार्मिंग के साथ-साथ पानी की कमी खल रही है। इसके देखते हुए वर्षा के पानी का संरक्षण करने के लिए सरकार ने पांच मुख्य विभागों को रेन वाटर हार्वेस्टिंग को प्राथमिकता के तौर पर प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। इसमें संबंधित विभाग ही नोडल एजेंसी होगा। पेयजल संकट, भूजल स्तर में गिरावट और पुराने सोत्रों के सुखने से सिंचाई के लिए पानी की किल्लत हो रही है।

इसके मद्देनजर प्रदेश की जयराम सरकार ने जल संरक्षण के लिए कई योजनाएं तैयार की हैं। रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम सरकार की पहली प्राथमिकता है। बताया गया कि पांच विभाग अपने-अपने स्तर पर बागवान, किसान एवं आम जनता को वाटर टैंक निर्माण के लिए सब्सीडी भी देगा। इसके लिए जल्द ही मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में अहम बैठक होगी। इसके साथ-साथ पहाड़ी क्षेत्रों के लिए स्नो हार्वेस्टिंग सिस्टम पर प्रदेश सरकार काम करेगी।

18 को होगा 4700 करोड़ के प्रोजेक्ट पर फैसला

रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए आईपीएच विभाग ने 4700 करोड़ का एक बड़ा प्रोजेक्ट भारत सरकार को फंडिंग के लिए भेजा है। इस पर 18 जुलाई को वित्त विभाग के आर्थिक मामले विभाग में फैसला होगा। संभावना है कि एडीबी को इसे फंडिंग के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद वर्षा जल संग्रहण पर बड़े स्तर पर काम होगा। करीब 500 करोड़ पहले चरण में धर्मपुर, सरकाघाट, घुमारवीं और बिलासपुर में खर्च करने का प्रस्ताव है।

 

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