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40 MW Sreerukkaji dam gets green signal

नई दिल्ली में हिमाचल प्रदेश समेत छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच एमओयू साइन

हिमाचल दस्तक। शिमला/नाहन : आखिरकार तीन दशकों से लंबित 40 मेगावाट विद्युत उत्पादन के रेणुकाजी बांध को हरी झंडी मिल गई है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित 6 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच 4600 करोड़ रुपये की परियोजना पर अंतिम मुहर लग गई।

जानकारी के मुताबिक केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर समेत हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों में इस परियोजना का एमओयू साइन किया है। गौर हो कि 70 के दशक से 40 मेगावाट विद्युत उत्पादन परियोजना श्रीरेणुकाजी का काम लंबित पड़ा था। शुक्रवार को 6 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हरी झंडी दे दी है। गौर हो कि ट्रांसगिरी के 1147 परिवार विस्थापित होंगे।

लंबे अरसे से इस परियोजना की एनओसी केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय व ग्रीन ट्रिब्यूनल में भी लंबित पड़ी था। बताते हैं कि ग्रीन ट्रिब्यूनल से भी इस परियोजना के निर्माण को मंजूरी मिल गई है। पर्यावरण संबंधी एनओसी मिलने से यमुना बेसिन के 4 राज्यों हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा व दिल्ली के बीच विवाद पैदा हो गया था जिसके चलते केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद इस विवाद का समाधान किया गया है।

इस परियोजना के तहत यमुना की सहायक नदी गिरी पर 148 मीटर ऊंचा बांध बनाया जाना है। इसके निर्माण पर करीब 4600 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आएगा। जलाशय की जल क्षमता 48.9 करोड़ घनमीटर होगी। हिमाचल प्रदेश को यमुना के 3.20 फीसदी जल का उत्पादन उपयोग करने का अधिकार होगा। इसके लिए हिमाचल प्रदेश को किसी भी राज्य अथवा केंद्र सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं होगी।

समझौते के अनुसार हिमाचल प्रदेश अपने राज्य का पानी किसी को भी बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र के बेच सकता है। गौर हो कि वर्ष 70 के दशक से रेणुका जी के गिरी नदी पर 40 मेगावाट विद्युत उत्पादन की परियोजना प्रस्तावित है। इस परियोजना के बनने से देश की राजधानी दिल्ली को पेयजल की आपूर्ति की जाएगी। बताते हैं कि रेणुकाजी बांध बनने से विस्थापित होने वाले 1147 परिवारों में से अधिकतर को मुआवजा राशि सरकार द्वारा दी जा चुकी है। अब केवल इन परिवारों के विस्थापन को लेकर सरकार द्वारा कार्य किया जाना है।

श्रीरेणुकाजी बांध एक नजर में

परियोजना प्रस्तावित               1976
विस्थापित परिवार                   1147
अधिकृत भूमि                        1508 हेक्टेयर
जल भंडारण 498 मिलियन घनमीटर
प्रतिदिन जलापूर्ति 525 मिलियन गैनल
बहुराष्ट्रीय परियोजना घोषित वर्ष 2008
झील की लंबाई              24 किलोमीटर
बांध की ऊंचाई               148 मीटर
परियोजना की कुल लागत 2015
के मुताबिक 4597 करोड़ रुपये
विद्युत उत्पादन            40 मेगावाट

बिजली पर सिर्फ हिमाचल का हक

बांध निर्माण के लिए 90 फीसदी खर्च केंद्र सरकार तथा 10 फीसदी खर्च अन्य राज्यों द्वारा किया जाएगा। जबकि विद्युत उत्पादन पर आने वाला पूरा खर्च दिल्ली सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। इस परियोजना से उत्पादित विद्युत पर केवल हिमाचल प्रदेश का ही अधिकार होगा, जबकि पानी पर दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड की बराबर हिस्सेदारी होगी।

 

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