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Arman of the gardeners scattered on the ground

छौहारा, रोहड़ू के संगरी, समरकोट, टिक्कर के दराढ़ा, हंसटाड़ी और जुब्बल के मंढोल, खड़ा पत्थर, बटाडग़लू में ओलावृष्टि से फसल तबाह,  सेब व गुठलीदार फसलों को भारी नुकसान,  24 व 25 अपै्रल को फिर से ओलावृष्टि की संभावना,  बागवानों को सलाह, 72 घंटे बाद ही करें स्प्रे

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला : अपर शिमला के कई क्षेत्रों में रविवार को भारी ओलावृष्टि हुई है। जिसके कारण एक बार फिर से बागवानों की मेहनत तबाह हो गई है। अपर शिमला के ठियोग, कोटखाई रोहड़ू व चौपाल के कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि से भारी नुकसान हुआ है। वहीं कुल्लू के आनी में भी ओलावृष्टि हुई है।

ऐसे में सेब की फसल एक बार फिर से तबाह हो गई है। गौर रहे कि निचले क्षेत्रों में सेब की सेटिंग हो चुकी थी। ऐसे में बागवानों को इस बार अच्छी फसल की उम्मीद थी। अचानक हुई ओलावृष्टि ने बागवानों की सारी उम्मीदों को तोड़ दिया हैं। बागवानों की मानें तो पिछले करीब पांच सालों से फ्लावरिंग या इसके तुरंत बाद ओलावृष्टि हो रही है। जिसके कारण बागवानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। अपर शिमला में बागवानी ही आमदनी का मुख्य जरिया है। जिनमें सेब व नाशपाती की मुख्य भूमिका है।

ऐसे में सेब की फसल तबाह होने से बागवानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। सेब व नाशपाती के साथ-साथ स्टोन फ्रूट फसलें जैसे चेरी, पलम, खुमानी भी तबाह हो गई है। इसके अलावा ओलावृष्टि ने सब्जी उत्पादकों की फसले तबाह कर दी है। अपर शिमला के निचले हिस्से में इन दिनों फूलगोभी, बीन्स, मटर जैसी फसल लगभग तैयार हो चुुकी थी। ऐसे यह फसलें भी तबाह हो गई हैं। उधर, मौसम विभाग ने प्रदेश के उच्च पर्वतीय व मध्यवर्ती क्षेत्रों में 24 और 25 को ओलावृष्टि की संभावना जताई है।

आर्थिक सहायता प्रदान करे सरकार

ठियोग और कोटखाई के बागवान संजीव शर्मा, पंकज चौहान, प्रशांत कुमार और विकेश शर्मा ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि सरकार प्रदेश सरकार को हुए नुकसान के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करे। उनका कहना है कि सेब की फसल ही आमदनी का मुख्य जरिया थी। ऐसे यह जरिया भी उन से छिन गया है। ऐसे में प्रदेश सरकार किसानों व बागवानों को आर्थिक सहायता प्रदान करे।

72 घंटे बाद पौधों का उपचार करेंं बागवान

बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज ने बागवानों को सलाह दी है कि वह 72 घंटे यानी 3 दिन के बाद ही पौधों का उपचार कार्य करें। इससे पहले किसी भी तरह की स्प्रे बागीचों में न करे। उनका कहना है कि तीन दिनों तक पौधा नेचुरल रिकवरी करता है। रससंचार के माध्यम से पौधा घाव को भरने की कोशिश करता है। ऐसे में इस बीच कोई छिड़काव करना बाधक हो सकता है। बागवानों को तीन दिनो तक को छिड़काव नहीं करना चाहिए।

यह करें उपचार

बागवानी विशेषज्ञ का कहना है कि बागवान ओलावृष्टि से हुए नुकसान का उपचार करने के लिए 200 लीटर पानी में डेढ़ किलो यूरिया, बोरिक एसिड 500 ग्राम जिंक सल्फेट, 250 ग्राम साधारण चूना मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं। डॉ. भारद्वाज का कहना है कि छिड़काव करते समय मौसम का ध्यान रखें। साफ मौसम में ही छिड़काव करें।

बारिश, ओलावृष्टि ने बढ़ाई ठंड

हिमपात और बारिश से तापमान में आई काफी गिरावट

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला: 
प्रदेश के ऊपरी क्षेत्रों में ओलावृष्टि हुई, जबकि निचले इलाकों में मौसम साफ बना रहा। ऊपरी क्षेत्रों में हुई ओलावृष्टि से तापमान में अचानक गिरावट आ गई है। जिसके कारण प्रदेश में एक बार फिर से ठंड बढ़ गई है। वहीं निचले क्षेत्रों में लगातार धूप खिलने से तापमान में कोई गिरावट दर्ज नहीं की गई है। ऊना जिलें में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया।

जबकि शिमला में अधिकतम तापमान 22.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। इसके अलावा हमीरपुर में 32.8 डिग्री, कांगड़ा में 31.7 डिग्री, सुंदरनगर में 31.2 डिग्री भुंतर में 30 डिग्री नाहन में 28.8 डिग्री, चंबा में 28.5 डिग्री, सोलन में 26.5 डिग्री, धर्मशाला में 22.2, कल्पा में 20 डिग्री और डल्हौजी में 16.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

अभी बढ़ सकती हैं बागवानों की दिक्कतें

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक मनमोहन सिंह का कहना है कि प्रदेश के ऊपरी व मध्यवर्ती क्षेत्रों में 24 और 25 अप्रैल को गरज के साथ बारिश व ओलावृष्टि के आसार हैं। ऐसे में किसानों व बागवानों की दिक्कतें फिर से बढ़ सकती हैं। वहीं राज्य के निचले व मैदानी क्षेत्रों में 27 अपै्रल तक धूप खिली रहेगी।

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