Ban on election results of non-gazetted employees' federation
  1. हाईकोर्ट ने कहा, चुनाव कानून हो, पर निर्भर अंतिम फैसले पर करेगा
  2. महासंघ के संविधान के दायरे में चुनाव करवाने के लिए कोर्ट पहुंचा केस
  3. राज्य सरकार और प्रतिवादियों से जवाब तलब, 4 हफ्ते बाद होगी सुनवाई

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला : हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका में प्रदेश उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि कराए जाने वाले चुनाव कानून के दायरे में हों, लेकिन चुनावों का निर्णय प्रदेश हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।

यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने शमशेर सिंह द्वारा दायर याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान पारित किए। इसके अलावा प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर याचिका का जवाब दाखिल करने के आदेश जारी किए गए हैं।

इस याचिका में हिमाचल प्रदेश नॉन गैजेटिड ऑफिसर फेडरेशन और निजी तौर पर बनाए गए प्रतिवादियों को भी नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है। याचिका में दिए गए तथ्यों के अनुसार राज्य सरकार ने हिमाचल में राज्य नॉन गैजेटिड ऑफिसर फेडरेशन को मान्यता प्रदान की है जो कि कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उनके प्रतिनिधियों को चुनने के लिए चुनाव करवाती है। इनकी जिला स्तर पर, राज्य स्तर पर और ब्लॉक स्तर पर ज्वॉइंट कंसल्टिंग कमेटी का गठन किया है, जिसमें कि फेडरेशन के पदाधिकारी शामिल किए जाते हैं।

फेडरेशन की चुनाव के लिए 18 फरवरी, 2018 को अधिसूचना जारी की गई थी और बिलासपुर में चुनाव करने का निर्णय लिया गया। प्रार्थी के अनुसार निजी तौर पर बनाए गए प्रतिवादी कथित तौर पर लीडर के तौर पर कार्य कर रहे हैं व अपने स्तर पर फेडरेशन के चुनाव को प्रभावित कर रहे हैं  विभिन्न विभागों में इन्होंने राजनीतिक वातावरण बना के रखा है।

प्रार्थी के अनुसार क्योंकि फेडरेशन का गठन राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर कर्मचारियों की मांगों को रखने के लिए किया गया है, इस कारण फेडरेशन के चुनाव पूर्णतया फेडरेशन के संविधान को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। मामले पर सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।

 

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