News Flash

नदी धोरोहर के सम्मान के लिए स्थानीय जनता कटिबद्ध

हिमाचल दस्तक। केलांग :  विश्व हिंदू परिषद के संस्थापक अशोक सिंघल के अस्थि विसर्जन से आरंभ किए गए चंद्रभागा संगम पर्व को तीसरे वर्ष भी धूमधाम से मनाया जाएगा। यह जानकारी संगम पर्व आयोजन समिति के प्रमुख डा. चंद्र मोहन परशीरा ने दी।

उन्होंने कहा कि आर्थिक संकटों के चलते पहले संगम पर्व को छोटे स्तर पर मनाने की सहमति बनी थी, लेकिन लाहुल में हुई बैठक में स्थानीय लोगों ने निर्णय लिया कि चंद्र भागा संगम पर्व को पूर्व की भांति ही धूमधाम से मनाया जाएगा। समिति अब एक बार फिर पुरे जिले से लोगों को संगम पूजन तथा संगम पर्व में आने के लिए निमंत्रण देगी। उन्होंने बताया कि चंद्रभागा संगम जिसे वैदिक समय में असिक्नी तथा उर्दू के आगमन के बाद चिनाब के नाम से भी जाना जाता है, यह विश्व की एक समृद्ध संस्कृति से युक्त प्रसिद्ध नदी है जिसमें द्रौपदी के बाद से ही अस्थि विसर्जन की परंपरा रही है।
चंद्रभागा संगम काशी की भांति एक महाशमशान भी है जिसे बौद्ध द्रुथोद त्सेंमो कहते है। परशीरा ने बताया कि संगम का पानी गंगा के पानी की तरह कभी खराब नहीं होता है तथा इन्हीं विशेषताओं को देखकर तीन वर्ष पहले चंद्रभागा संगम पर्व के आयोजन की शुरुआत की थी। चंद्रभागा संगम पर्व में दोनों बार देश के प्रसिद्ध लोग पहुंचे हैं जिनमें भारत सरकार के संस्कृति मंत्री डा. महेश शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, मनाली के तत्कालीन विधायक एवं वन, परिवहन, युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री गोविंद ठाकुर तथा विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संगठन महामंत्री दिनेश चंद्र आदि प्रमुख हैं।
संगम पर्व के स्थान पर पूर्व के सरकार ने घाट बनाने के लिए उदघाटन पट्टिका भी लगाई थी तथा वर्तमान सरकार भी यहां पर घाट निर्माण की बात कर चुकी है। केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने जहां प्रदेश में पर्यटन विकास के लिए 200 करोड़ की घोषणा की थी वहीं, पहले संगम पर्व में स्थानीय सांसद राम स्वरूप शर्मा ने संगम स्थल पर बौद्ध स्तूप बनाने की घोषणा की थी।
इस के पश्चात पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र ने भी पचास लाख की घोषणा करके संगम घाट का शिलान्यास भी कर दिया था। डा. परशीरा ने कहा कि इस वर्ष भी गांव-गांव से यथा इच्छा अनाज का दान इकठ्ठा किया जाएगा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही इस बार भी हिंदू एवं बौद्ध रीति से संगम पूजन किया जाएगा और हिंदू एवं बौद्ध धर्म गुरुओं को भी बुलाया जाएगा। बैठक में गौशाल, मुलिंग, बरगुल, शिपटिंग, तांदी आदि गांव के लोगों ने भाग लिया जो चंद्रभागा संगम के निकटवर्ती गांव हैं ।

Comments

Coming soon

Career Counsling

Get free career counsling and pursue your dreams