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Congress intended, coordination at integrating more

अंदरूनी टस्सल :  पहली दफा सुक्खू को मिली अग्निहोत्री-रायजादा से सीधी टक्कर, ऊना का कांग्रेसी उफान कर गया सब बयान

हिमाचल दस्तक :उदयबीर पठानिया :  शुक्रवार को ऊना में बवाल के हालात थे। कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू की कॉल पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती के घर का घेराव होना था। पर अचानक हालात ने ऐसी पलटी मारी कि सुक्खू खुद ही घिर गए और वह भी उन अपनों से जिनके साथ सुक्खू कभी सुख-दुख साझे किया करते थे। भाजपा वाले सत्ती को घेराव से बचाने के लिए घेराबंदी किए हुए थे, तो कांग्रेसी सत्ती की जगह सुक्खू की घेराबंदी पर ताकत लगाए हुए थे।

दरअसल, सुक्खू के सत्ती के घेराव के उस ‘आह्वान’ को कांग्रेसी नेताओं की ‘आह’ लग गई, जिस आह्वान में उनको हाईकमान से ‘वाह’ मिलने की उम्मीद थी। सुक्खू के आह्वान पर कुछ कांग्रेसी घेराव के लिए तैयार थे। अचानक नेता प्रतिपक्ष और सीएलपी लीडर मुकेश अग्निहोत्री और ऊना के विधायक सतपाल सिंह रायजादा ने यह फैसला लिया कि सत्ती के घर का घेराव नहीं किया जाएगा। कायदे से सुक्खू का प्रदेशाध्यक्ष पद से हटने के बाद सीएलपी लीडर अग्निहोत्री के गृह जिले और रायजादा के घर में उनका यह सीधा हस्तक्षेप था।

हैरानी की बात यह थी कि इस बाबत सुक्खू ने मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर से भी इस एलान के बाबत कोई आदेश तो दूर की बात चर्चा तक नहीं की थी। नतीजा यह हुआ कि सुक्खू अकेले पड़ गए और बकाया कांग्रेस एकजुट हो गई। जो रायजादा टिकट वितरण की बेला में सुक्खू के सुर में सुर मिलाए हुए थे, वह भी कांग्रेस के साथ और अग्निहोत्री के संग हो लिए। अचानक कांग्रेस के अंदरूनी समीकरण अलग दिशा में घूम गए।

कांग्रेस के अंदरूनी हालात बदलने से पहले जो बाहरी हालात बदले थे, वह भी एक तीर से कई निशाने साधने वाले थे। अमर्यादित भाषा का जो सांप भाजपा के गले मे पड़ा हुआ था, घेराव की हल्की सी चूक से वह कांग्रेस के गले की फांस बन सकता था। बस इसी आधार पर अग्निहोत्री और रायजादा ने घेराव न करने का फैसला लेते हुए सुक्खू के एलान से फासला बना लिया। सुक्खू के आह्वान को यह कह कर कांग्रेस ने किनारे रख दिया कि सत्ती के घर में घेराव करना सीधे तौर पर उनके परिवार और परिवार की महिलाओं का अपमान होगा। अगर ऐसा किया गया तो भाजपा और कांग्रेस में कोई फर्क नहीं रह जाएगा।

जबकि अंदरखाते गुस्सा इस बात का भी था कि जब चुनाव आयोग के पास सत्ती के खिलाफ शिकायतें पार्टी और सीएलपी की तरफ से जा चुकी थीं, उन पर आयोग सख्त फैसले भी ले रहा था, तो सुक्खू ने किस बिनाह पर एकल शो करने की कवायद शुरू की। कांग्रेस के नेताओं ने पार्टी के अंदर सुक्खू के हस्तक्षेप पर सीधे तो कोई हमला नहीं किया, अलबत्ता वाया सत्ती यह जरूर एहसास करवा दिया कि चर्चा में रहने के लिए सुक्खू के इस कदम का खर्चा पार्टी सहन-वहन नहीं करेगी। पूर्व में लोकसभा की टिकट की हुई लड़ाई में इस कवायद को सियासी माहिर अग्निहोत्री का पलटवार भी मान रहे हैं।

इनका कहना है कि उस दौर में सुक्खू खुद अग्निहोत्री को जबरन चुनाव की जमीन पर उतारना चाह रहे थे। पर जब मौका हाथ लगा तो उन्होंने सुक्खू को ही भूमि दर्शन करवा दिया। इस बाबत जब प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर से संपर्क किया गया तो उन्होंने कोई भी टिप्पणी करने की जगह कहा कि चलो, चलने दीजिए, किसने क्यों कोई ऐसा एलान किया, यह वही जानें।

 

 

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