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Cultivation of wild marigold will bring fragrance of prosperity
  • 10 हजार रुपये में बिकता है जंगली गेंदे का एक लीटर तेल 
  • एचएफआरआई में औषधीय खेती पर कार्यशाला
  • जड़ी-बूटियों की खेती से कमा सकते हैं मुनाफा

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला : बंजर जमीन या सड़क के किनारे उगने वाले पीले रंग का फूल, जिसे जंगली गेंदे के नाम से जाना जाता है। यह फूल आपकों मालामाल बना सकता है। इसकी खेती से आप अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। जंगली गेंदे की खुशबू के कारण इससे निकलने वाले तेल को परफ्यूम बनाने के इस्तेमाल किया जाता है।

जंगली गेंदे का एक लीटर तेल 10 से 11 हजार रुपये में बिकता है। यह जानकारी शुक्रवार को हिमालयन रिसर्च अनुसंधान केंद्र पंथाघाटी में महत्वपूर्ण शीतोष्ण औषधीय पौधों की खेती पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के समापन अवसर पर यूएचएफ नौणी के प्रो. यशपाल शर्मा ने बताई। हिमाचल प्रदेश में सड़कों के किनारे व बंजर खेतों में यह फूल अकसर देखा जाता है, लेकिन लोगों को इसकी सही जानकारी न होने से लोगों इसके बारे में जागरूक नहीं हैं। उन्होंने बताया इसके खेती लोग काफी मुनाफा कमा सकते हैं। रोजमेरी की एक हेक्टेयर खेती में 2,40,000 रुपये की पैदावार होती है।

जंगली गेंदे का तेल बनाने के प्रोसेसिंग या डिस्ट्रेलशन यूनिट की लगाने पर लोगों को शुरूआत में खर्च उठाना पड़ता हैं। इसके इस यूनिट को स्थापित करने के बाद लोग आसानी से मुनाफा कमा सकते है। इस यूनिट को स्थापित करने के लिए करीब 50 हजार रुपये का खर्च आता है। संस्थान के निदेशक, डॉ. एसएस सामंत ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्रा वितरित किए। कार्यक्रम के अंत में डॉ. संदीप शर्मा, प्रशिक्षण कार्यक्रम समन्वयक ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया तथा कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए विभिन्न संस्थानों से आए रिसोर्स पसर्नस एवं प्रशिक्षणार्थियों का बहुमूल्य समय निकालने तथा सक्रिय भागीदारी के लिए धन्यवाद किया।

कई गुणों से भरपूर है चितौरा

कार्यशाला के दौरान औषधीय खेती के विशेषज्ञ ने एक और औषधीय पौधे के बारे में भी बताया। इस पौधे का नाम है चितौरा। यह कई औषधीय गुणों से भरपूर है। इसकी खेती से जहां आप भरपूर मुनाफा कमा सकता हैं, तो वहीं इसके सेवन से कई बीमारियों का नामों निशान मिट जाता है। इस पौधों के पांच अंगो, जिनमें जड़, तना, पत्तियां, बीज एंव फूल सभी बहुत फायदे है। इसके सेवन से शुगर, इम्यून सिस्टम, एंटी फंंगल समेत कई प्रकार की बीमारियों पर काबू पाया जा सकता है।

80 प्रतिशत पुदीने का तेल उत्पादन करता है भारत

कार्यशाला के दौरान यूएचएफ नौणी के प्रो. यशपाल शर्मा ने बताया कि सन 1907 से पहले भारत में पदीनें के तेल के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। इसकी यहां पर सिर्फ इसकी पत्तियों का ही प्रयोग किया जाता है। आज स्थिति यह है कि पूरे विश्व में पुदीने के तेल में भारत की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत है। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने हिमालय क्षेत्र उग सकने वाली जूड़ी बूटियों के बारे में जानकारी दी।

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