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Dead body ban is helpful in grief

कश्मीर के शव को पहुंचाया घर तक, मुकेश अस्पताल में रोक भतीजे ने मांगी थी मदद

राजीव भनोट।ऊना : दुख में जब परिवार हस्पताल में अपने किसी परिजन के शव को लेकर दुखी व भारी मन से होते हैं, ऐसे समय में पैसों से शव ले जाने के लिए गाड़ी करनी पड़ती है तो काफी देर तक इंतजार भी करना पड़ता है। दुखी परिवार के लिए यह लम्हे कष्टदायक होते हैं ।ऐसे में ऊना में स्वर्गीय निर्मल बस्सी की याद में शुरू की गई डेड बॉडी वैन मददगार बन रही है।

यह डेड बॉडी वैन निशुल्क शव को घर तक पहुंचाने का काम करती है । बुधवार को क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री पहुंचे थे इसी दौरान एक बालक  जिसके ताया कश्मीर सिंह निवासी कांटे की मृत्यु ऊना अस्पताल में हुई थी को घर तक ले जाने के लिए किसी वाहन की व्यवस्था नहीं हो पा रही थी, तो इस बालक ने नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री की उंगली पकड़ी और कहा कि आप हमारे विधायक हैं और ताया जी की मृत्यु हो गई है घर तक पहुंचाने के लिए किसी एंबुलेंस की व्यवस्था करवा दें ,जिस पर मुकेश अग्निहोत्री ने कश्मीर सिंह के परिवार के साथ संवेदनाएं व्यक्त की और बालक को वाहन उपलब्ध करवाने की बात कही ।
तभी उन्होंने डेड बॉडी वैन के लिए संपर्क करवाया और कुछ ही समय में क्षेत्रीय अस्पताल परिसर में डेड बॉडी (शव वाहन)पहुंची और कश्मीर के शव को उसके परिजनों के साथ हरोली के कांटे गांव तक पहुंचाया गया। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने डेड बॉडी जैसी सुविधा को पुण्य का कार्य करार दिया। इस शव वाहन को एमके बस्सी , सचिन बस्सी,सांची बस्सी परिवार दुवारा इनरव्हील क्लब को दिया गया। यह शव वाहन काफी मददगार दुखघड़ी में बन रहा है।

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