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Due to slack attitude, rescue operation, lack of coordination in administration

बारालाचा में बिगड़ रहे हालात, कुल्लू पहुंचे लोगों ने सुनाई दास्तां,शीतदंश की वजह से कई मजदूरों की हालत नाजुक

हिमाचल दस्तक। केलांग : जनजातीय लाहौल-स्पीति में अभी भी सैकड़ों लोग जिंदगी और मौत की लड़ाई लडऩे को मजबूर हैं। बुधवार को चलाया गया रेस्क्यू अभियान सुस्त प्रणाली से दिनभर चलता रहा। कुल्लू प्रशासन के अधिकारियों में आपसी तालमेल की कमी नजर आई।

बारालाचा से कुल्लू पहुंचे कोलकता के जगदीश चक्रवती, पटना के विनोद सिंहा, नेपाल के कुनामा लामा ने बताया कि बारालाचा में हालात पल-पल बद से बदतर होते जा रहे हैं। माइनस तापमान में जिदंगी की लड़ाई लडऩा बेहद मुश्किल होता जा रहा है। बुधवार को ढालपुर से चौपर लाहौल के लिए उड़ा, लेकिन प्रशासन से तालमेल न होने की वजह से चौपर चार घंटे बाद बेस कैंप ढालपुर से राशन सामग्री लेकर गया, लेकिन रेस्क्यू टीम को ढालपुर बेस कैंप में ही उतारा गया।

चौपर बिना रेस्क्यू टीम के ही लाहौल की ओर उड़ा। रेस्क्यू टीम के सदस्यों ने बताया कि बारालाचा सहित अन्य जगहों पर हालात काफी खराब हैं, ऐसे में रेस्क्यू टीम के सदस्यों को इन जगहों पर रेस्क्यू अभियान चलाने के लिए तुंरत ले जाना चाहिए था। रेस्क्यू टीम पूरा दिनभर बेस कैंप ढालपुर में ही चौपर के जरिये लाहौल जाने का इंतजार करती रही। कुल्लू पहुंचे लोगों ने कहा कि जिला प्रशासन को तुंरत रेस्क्यू
टीमें भेजकर फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना चाहिए। वहीं, बारालाचा  में बर्फबारी के बीच करीब 150 मजदूर फंसे हुए हैं, जिसमें से शीतदंश से 15 मजदूरों की स्थिति नाजुक बनी हुई है।

 

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