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Education hub began to fade

शिक्षा के निजीकरण के साथ ही प्रदेश में भी पिछले कुछ वर्षों के दौरान निजी शिक्षण संस्थानों की बाढ़ सी आ गई। जहां गली-मोहल्लों में स्कूलों के धंधे ने जोर पकड़ा, वहीं बड़ी संख्या में निजी कॉलेज व विश्वविद्यालय भी अस्तित्व में आ गए। शुरू-शुरू में प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर खुले इन संस्थानों में प्रदेश के ही नहीं, बाहरी राज्यों से आने वाले छात्रों की संख्या भी अच्छी-खासी रही।

लेकिन, समय के साथ दाखिलों में कमी आती गई और आज जहां कई कॉलेज-यूनिवॢसटीज अपना बोरिया-बिस्तरा समेट चुकी हैं, वहीं कुछ संस्थान सरकार के साथ हुए एमओयू की शर्तों के चलते मजबूरी में जैसे-तैसे चल रहे हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है प्रदेश में शिक्षा का हब बनकर उभरा सोलन जिला। यहां निजी स्कूलों के साथ-साथ 9 नामी विश्वविद्यालयों का आगमन हुआ तो पीजी कल्चर बढऩे के साथ-साथ कारोबार में भी इजाफा हुआ। लेकिन, आज इस शिक्षा हब की चमक फीकी पडऩे लगी है। 2-3 अपवादों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर संस्थान दाखिलों के गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। शायद ही कोई कोर्स ऐसा हो जिसमें पूरी सीटें भर पा रही हों। जिले के शिक्षण संस्थानों की वर्तमान हालत और उसके असर का अवलोकन करती ‘हिमाचल दस्तक’ की रिपोर्ट-

सोलन जिला में शिक्षा हब की चमक अब फीकी पडऩे लगी है। सरकार ने क्षमता से अधिक निजी कॉलेज व विश्वविद्यालय खोल तो दिए हैं, लेकिन इन संस्थानों में छात्र कहां से आएंगे यह सभी के लिए यक्ष प्रश्न बना हुआ है। ज्यादातर शिक्षण संस्थानों में छात्रों की संख्या लगातार घट रही है। कुछ विश्वविद्यालय तो बंद होने की कगार पर हैं। इन संस्थानों की विवशता यह है कि सरकार के साथ किए गए करार की वजह से निर्धारित अवधि से पहले इन्हें बंद भी नहीं किया जा सकता है।

सोलन में जेपी यूनिवर्सिटी, शूलिनी विश्वविद्यालय तथा चित्तकारा विश्वविद्यालय ही तीन ऐसे संस्थान हैं, जहां पर प्रत्येक वर्ष औसतन एडमिशन हो जाती है। इन विश्वविद्यालयों की आर्थिक स्थिति अन्य यूनिवर्सिटीज की अपेक्षा काफी अच्छी बताई जाती है। शिक्षा के स्तर की बात करें तो अधिकतर छात्र इन विश्वविद्यालयों में जाना पंसद भी करते हैं।

अन्य विश्वविद्यालयों में छात्रों की संख्या लगातार घट रही है। प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक्स मीडिया में लाखों रुपये का विज्ञापन देने के बावजूद भी अधिकर कोर्स की सीटें खाली रह जाती हैं। सीटें न भरने के कारण संस्थानों की हालत लगातार खराब होती जा रही है। कुछ विश्वविद्यालय व संस्थानों में तो कर्मचारियों का वेतन तक देने के लिए भी धन नहीं है।

छात्र शिक्षा ग्रहण तो कर रहे हैं, लेकिन पढ़ाने वाले शिक्षकों का अभाव हमेशा बना रहता है। बताया जा रहा है कि इन शिक्षण संस्थानों में 80 प्रतिशत हिमाचली छात्र शिक्षा ग्रहण करते हैं। मात्र 20 प्रतिशत छात्र ही बाहरी राज्यों के यहां आते हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि हिमाचल प्रदेश की कुल आबादी की तुलना में कितने छात्र यहां शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते होंगे।

ये कोर्स करवाए जा रहे हैं निजी विश्वविद्यालयों में

जिला सोलन में 9 विश्वविद्यालय हैं। इन संस्थानों में बीए, एलएलबी, बीसीए, बीएसी, बी. फार्मेसी, डी. फार्मेसी, एम. फार्मा, एमए इग्लिश, एमबीए, बीबीए, बीकॉम, बीटेक इलेक्ट्रिक इंजीनिरिंग, बीटेक सिविल इंजीनिरिंग, बीटेक बॉयो टेक्नोलॉजी, बीटेक कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, जर्नलिज्म जैसे कोर्स बच्चों के लिए मौजूद हैं।

पीजी कल्चर ने शहर से गांव में पहुंचाया रोजगार

सोलन जिले में निजी विश्वविद्यालय खुलने के बाद रोजगार के साधन भी सृजित हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर में पीजी खुले हैं। शिक्षण संस्थानों में शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्र ग्रामीणों के लिए रोजगार का मुख्य साधन हैं। यहां तक कि ग्रामीण क्षेत्रों में शहर की तर्ज पर रेस्तरां भी अब खुलने लगे हैं और दर्जनों लोगों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। कुम्हारहट्टी के साथ लगती सुल्तानपुर पंचायत शिक्षा हब के रूप में विकसित हुई है। इस पंचायत में मानव भारती विश्वविद्यालय, एमएमयू मेडिकल कॉलेज व विश्वविद्यालय तथा वैंकटेश्वर विद्यापीठ बीएड कॉलेज स्थित है। इसके बाद लगती टूटल पंचायत में भी शूलिनी विश्वविद्यालय, डेंटल कॉलेज हैं ।

इसी प्रकार ओच्छघाट पंचायत में एलआर कॉलेज व मुरारी लाल नॄसग कॉलेज हैं। करीब 10 किलोमीटर के दायरे में ही यह निजी विश्वविद्यालय तथा कॉलेज स्थित हैं। इन संस्थानों में 10 हजार से अधिक छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। अधिकतर छात्र आसपास की पंचायतों में ही रहते हैं। बीते एक दशक में सोलन की ओच्छघाट, टटूल तथा सुल्तानपुर पंचायतों का शहरीकरण हुआ है। इन पंचायतों के घर-घर में स्थानीय लोगों ने पीजी खोल रखे हैं।

कुछ लोगों ने तो पीजी व्यवसाय को काफी बड़े पैमाने पर शुरू किया है। 100 से 150 कमरे पीजी के लिए तैयार किए गए हैं। एक दशक पहले तक जो पंचायतें पिछड़ा क्षेत्र हुआ करती थीं, वह आज शहर की तर्ज पर विकसित हो चुकी हैं। प्रत्येक परिवार पीजी के माध्यम से 20 हजार रुपये से दो लाख रुपये प्रतिमाह तक की आय अर्जित कर रहा है। इसी प्रकार सोलन जिला के बद्दी क्षेत्र में भी पीजी कल्चर तेजी से विकसित हुआ है। अटल शिक्षा कुंज में पांच निजी विश्वविद्यालय स्थापित किए गए हैं। इन विश्वविद्यालयों में करीब सात हजार छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं तथा अधिकतर छात्र आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में या तो पीजी में रह रहे हैं या फिर किराये के कमरे में रहते हैं। विश्वविद्यालय खुलने के बाद घर-घर में रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।

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