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Even before the purchase, the 'Setting' from Jam portal

मोदी को भी मात दे गई आयुर्वेद विभाग की ये खरीद, डीलिंग असिस्टेंट की डायरी से हुए हैरतअंगेज खुलासे ,कार्मिक विभाग को रेफर हुआ केस,नपेंगे पूर्व निदेशक

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेशक सभी सरकारी विभागों और राज्य सरकारों को जैम पोर्टल से सामान खरीदने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हों, लेकिन उनको भी शायद यह आभास नहीं रहा होगा कि जैम पोर्टल से ‘सेटिंग’ करके भी खरीद में गड़बड़ी की जा सकती है। और यह कारनामा हिमाचल के आयुर्वेद विभाग ने करके दिखाया है।

कुछ दिन पहले आयुर्वेद विभाग में हुई खरीद की गड़बड़ी में तकनीकी कमेटी के 3 अधिकारियों को सस्पेंड किया गया था। इसके बाद सरकार ने यह खरीद करने वाले निदेशक को भी हटा दिया, लेकिन इस घटना की विभागीय जांच में हैरतअंगेज खुलासे हुए हैं। पता चला है कि जिस जैम पोर्टल से यह सामान खरीदा गया, उस पर दिखाए गए विक्रेताओं या उत्पादकों से विभाग ने पहले ही सेटिंग कर ली थी। निदेशालय के डीलिंग असिस्टेंट के पास वो डायरी मिल गई है, जिसमें साहब के लिखवाए ऐसे लोगों की सूची और संपर्क नंबर था, जिनसे बाद में जैम पोर्टल के जरिये सामान कांगड़ा के उस डायरी में थे। यही नहीं, इनके निक नेम भी लिखवाए गए थे। जिसका अर्थ है कि खरीद करने वाले इनको अच्छी तरह से जानते थे।

इसके बाद बिड पार्टल पर डाली गई और विक्र्रेता कंपनियों ने ही यह आइडिया दिया कि कौन सा गोल्डन फिल्टर लगाकर केवल उनका उत्पाद वे खरीद सकते हैं? जो उत्पाद गोल्डन फिल्टर से नहीं चुने जा सके, उनके लिए वारंटी पीरियड जैसे अन्य विकल्पों को चुना गया। इसका मकसद था इनके उत्पाद बाजार से महंगे दामों पर खरीदना। इस खरीद के जरिये करीब 2 करोड़ से ज्यादा धनराशि से करीब 11 आइटम्स खरीदी गईं। इसमें थर्मामीटर, स्टेथोस्कोप, वेइंग मशीन, ग्लूकोमीटर, एचबी मीटर, स्ट्रिप्स और पल्स मीटर आदि शामिल है।

पता चला है कि जब इस खरीद की खामियां पकड़ी गईं तो निदेशालय से ही ऐसे पत्र सरकार को भेजे गए, जिनमें जैम पोर्टल की शिकायत के बहाने अपनी करतूत को छिपाया गया। यह प्रारंभिक जांच विभाग की ही संयुक्त निदेशक ने की है। जांच रिपोर्ट आयुर्वेद सचिव को दी गई है, लेकिन इस जांच रिपोर्ट के तथ्यों के आधार पर अब मामला कार्मिक विभाग को सौंपा गया है। चूंकि इसमें एक आईएएस अधिकारी शामिल है, इसलिए कार्रवाई से पहले सभी तथ्यों को जोड़ा जा रहा है। बहुत जल्द इस केस में पूर्व निदेशक भी नप सकते हैं।

कॉल, बैंक डिटेल्स के लिए विजिलेंस को जा सकता है केस

सरकार ने इस केस में अभी तक केवल तकनीकी कमेटी के 3 सदस्यों को सस्पेंड किया है। इनमें डिप्टी डायरेक्टर कांगड़ा, जिला आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी शिमला और सब डिवीजन आयुर्वेद मेडिकल अफसर संधु ठियोग शामिल हैं। लेकिन प्रारंभिक जांच में कहा गया है कि इस मामले में फोन कॉल रिकॉर्ड और बैंक डिटेल्स चेक करनी जरूरी है, क्योंकि पैसे के लेन-देन की आशंका है। ऐसा केवल विजिलेंस जांच से ही संभव है। इस पर अब कार्मिक विभाग फैसला लेगा, क्योंकि अभी तक आयुर्वेद विभाग या आयुर्वेद मंत्री ने इस बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है।

 

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