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Government details of FIR sent to Ministry of Personnel

छात्रवृत्ति घोटाला: पहले दिल्ली पुलिस एक्ट के तहत दर्ज होगा मामला, इसके बाद नए सिरे से जांच करेगी सीबीआई 

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला : शिक्षा विभाग में लगभग 250 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले को लेकर प्रदेश सरकार ने अब कार्मिक मंत्रालय को प्रदेश के पुलिस विभाग में दर्ज एफआईआर का ब्योरा भेज दिया है। यह मामला दिल्ली पुलिस एक्ट के तहत दर्ज होगा और फिर सीबीआई अपने स्तर पर जांच आरंभ करेगी।

प्रदेश के शिक्षा विभाग में करोड़ों के इस स्कॉलरशिप घोटाले में जांच धीमी गति से आगे सरक रही है। इसका कारण था कि सरकार ने मामले में सीबीआई जांच की तो मांग की, लेकिन इसके लिए कार्मिक मंत्रालय को जुड़े सभी दस्तावेज मुहैया नहीं करवाए थे। सीबीआई इस केस में तभी हाथ डाल सकती है, जब उसे कार्मिक मंत्रालय से हरी झंड मिलती। कार्मिक मंत्रालय भी मामले को आगे नहीं कर पा रहा था, क्योंकि उसके पास कागजात पूरे नहीं थे।

दूसरी तरफ प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच शुरू न होने को लेकर मंत्रालय को रिमाइंडर भी भेजा था। अब कार्मिक मंत्रालय ने प्रदेश सरकार से ही मामले की पूर्ण जानकारी सहित यहां दर्ज एफआईआर का ब्योरा भी तलब किया। गौर रहे कि प्रदेश के शिक्षा विभाग में बीते वर्ष ही लगभग 250 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले का पर्दाफाश हुआ था। इसमें विभाग के अधिकारियों ने निजी शिक्षण संस्थानों से मिलीभगत करके विभिन्न श्रेणी के छात्रों का पैसा डकार लिया। इसमें राष्ट्रीयकृत बैंकों की मिलीभगत भी सामने आई। 2013-14 से लेकर 2016-17 तक किसी भी स्तर पर छात्रवृत्ति योजनाओं की मॉनीटरिंग नहीं हुई।

छात्रवृत्ति का 80 फीसद बजट सिर्फ निजी संस्थानों में ही बांट दिया गया और सरकारी शिक्षण संस्थानों को को मात्र 20 फीसदी हिस्सा ही मिला। बाद में जब मामले को लेकर विभागीय जांच हुई तो सामने आया कि इसमें प्रदेश के अलावा बाहरी राज्यों के भी कई शिक्षण संस्थान शामिल हैं, जबकि प्रदेश के लगभग 26 निजी शिक्षण संस्थान भी जांच दायरे में हैं। बीते चार साल में 2.38 लाख विद्यार्थियों में से 19,915 को चार मोबाइल फोन नंबर से जुड़े बैंक खातों में छात्रवृत्ति की राशि जारी की।

360 विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति चार ही बैंक खातों में ट्रांसफर हुई। 5729 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने में तो आधार नंबर का प्रयोग ही नहीं किया गया। सबसे अधिक बैंक खाते हरियाणा राज्य में थे। कई निजी शिक्षण संस्थानों ने फर्जी एडमिशन दिखाकर सरकारी धनराशि का गबन किया। प्रदेश के 25 हजार छात्रों के वजीफे डकार लिए जाने का अनुमान है। निजी संस्थानों में दाखिले के दौरान फर्जी दस्तावेज लगे थे, जबकि आधार नंबर अन्य छात्रों के नाम थे। शिक्षा विभाग की जांच में यह भी पाया गया कि एडमिशन फॉर्म में किसी अन्य छात्रों के फोटो लगे थे।

 

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