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If Anil made nineteen-twenty-one, then the result would be tenacious
  •  इस बात को भी तो नकारा नहीं जा सकता कि आपकी घर की सीट मंडी में ही बवाल मचा हुआ है…

बवाल था, पर वो भाजपा का नहीं, सुखराम फैमिली का मचाया हुआ बवाल था। अब सब साफ है। हम जीत रहे हैं।

  • अनिल शर्मा जुदा हो गए आपसे…

अनिल को लेकर मैं ज्यादा नहीं सोचता। अब सिर्फ इतना सा रिश्ता है कि वह भाजपा के मेंबर हैं। इससे ज्यादा कोई वास्ता नहीं इस परिवार से। पर जब तक वह भाजपा के सदस्य हैं, वह बेटे के लिए प्रचार तो दूर, एक लफ्ज तक नहीं बोल सकते। अगर उन्नीस-इक्कीस किया तो नतीजा भी तिया-पांचा करने वाला होगा। भाजपा के उसूलों और कांग्रेसी कल्चर में सदियों का फर्क है।

  •  मतलब, अनिल आजादी की तलाश में हैं भाजपा से?

भाजपा के प्लेटफॉर्म से मैं तो कोई आजादी नहीं देने वाला। मैंने बराबर नजर रखी हुई है, इनके कंडक्ट पर भी, बिहेवियर पर भी। मसला है सामाजिक और राजनीतिक निष्ठाओं का। यह तो वो लोग हैं, जो बेटे की टिकट के लिए सुबह भाजपा कैंप में तो शाम को कांग्रेस के तंबुओं में हाजिरी लगाते रहे। यह मेरे पास भी आए थे। मैंने दो टूक कहा कि टिकट का फैसला हाईकमान करता है, वही करेगा। अगर टिकट दी गई तो हम सब मिलकर काम करेंगे। नहीं मिली तो आपको भाजपा के लिए काम करना होगा। यह मान भी गए। पर मोल-भाव करने से भी नहीं चूके। यह कर दो जी, वो कर दो जी जैसी बातें शुरू कर दीं। मगर इनको यह मालूम नहीं था कि भाजपा हाईकमान मोल-भाव तो दूर की बात, ऐसी बात सुनना भी पसंद नहीं करता। नतीजा आपके सामने है। एथिक्स की वैल्यू होती है, परिवार की नहीं।

  • पर आप भी तो कोटली में सियासत के प्रचंड रूप में नजर आए थे…

मेरे लिए भाजपा और शीर्ष नेतृत्व सर्वोपरि है। कोई एक परिवार या कथित बड़ा नेता नहीं। आडवाणी जी के लिए अनिल ने सही नहीं कहा। मोदी जी पर निशाने साध दिए। कोटली के बाद ही तो अनिल ने इस्तीफा दिया। नहीं तो यह वही अनिल थे, जो यह कह रहे थे कि इस्तीफा नहीं दूंगा, चाहे जो मर्जी कर लो। हाईकमान ने पूरा हक दिया हुआ है। अगर यह इस्तीफा नहीं देते तो पूरा स्कोप था कि इनको बाहर कर दिया जाता।

  •  आपने भी कोई दुखती रग दबाई होगी? बीते कल भी आपने कहा था कि अनिल चुप रहेंगे तो सुखी रहेंगे…

मेरा यह मानना है कि जनता को मालिक समझना चाहिए, न कि अपने हुक्म का गुलाम। कोटली में जब इनका स्ट्रांग
होल्ड टूटा तो इनका भ्रम भी टूट गया। पहले कहते थे कि मुझे निकालने का दम है तो निकालो, फिर खुद ही निकल गए।

  • सीएम तो कोई भी बन जाता है, नेता कोई-कोई बनता है, वाले बयान पर गुस्सा तो आपको भी आया होगा?

गुस्सा तो नहीं, तरस जरूर आया था। आप अपने पिता जी के धनबल पर कब तक और कितना इतरा सकते हो? हर वक्त की एक सीमा होती है। मैं तो मंडी का बेटा हूं और पूरा प्रदेश भी मेरा है।

  • सलमान खान का दौरा हो गया तो?

इन लोगों की ऐसी ही बातों को लेकर मुझे ऐसा लगा कि यह लोग दुनिया को अपने सामने कुछ आंकते या मानते ही नहीं हैं। हम जमीन से जुड़े हुए लोग हैं, जमीन पर ही रहेंगे। राजनीति में ऐसे दौर चलते रहते हैं। कोई परवाह नहीं।

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