नौणी विवि में आठ लाख के प्रोजेक्ट पर हो रहा शोध

हिमाचल दस्तक : भूपेंद्र ठाकुर। सोलन : डॉ. वाईएस परमार वानिकी एवं औद्योनिकी विवि नौणी का परीक्षण यदि सफल रहा तो इंडोर प्लांट के माध्यम से क्षय रोग सहित अन्य श्वास रोगों से होने वाले संक्रमण पर काबू पाया जा सकेगा।

इस परीक्षण व शोध के लिए पर्यावरण विज्ञान एवं औद्योनिकी विभाग ने विवि को आठ लाख रुपये का प्रोजेक्ट दिया है। प्रोजेक्ट के तहत पांच साल में वायु प्रदूषण व श्वास रोग के बीच क्या संबंध है का भी पता लगाया जाएगा। जानकारी के अनुसार अब तक किए गए शोध में पाया गया है कि सोलन जिला क्षयरोग के लिए सबसे अधिक संवेदनशील है। क्षय रोग के मामले बढऩे की वजह उद्योग व शहरीकरण हो सकता है। वायु में ऐसे कई हानिकरक माइक्रो कण पाए गए हैं जो कि क्षय रोग व अन्य श्वास संबंधित रोगों का कारण बन रहे हैं। नौणी विवि द्वारा वायु प्रदूषण आकलन एवं पर्यावरण सुधार-क्षय रोग उपचार प्रोजेक्ट के तहत शोध किया जा रहा है।

शोध के दौरान पता लगाया जाएगा कि क्षय रोग जैसी जानलेवा बीमारियां हिमाचल प्रदेश में क्यों फैल रही हैं। इन बीमारियों की रोकथाम कैसे की जा सकती है। विवि के वैज्ञानिक डॉ. अजय सिंह इस कार्य पर शोध कर रहे हैं। अब तक किए गए शोध में पाया गया है कि कई ऐसे इंडोर व आउट डोर प्लांट क्षय रोग की रोकथाम करने में सहायक साबित होते हैं। स्पाइडर प्लांट, गोल्डन पोथोस, पीस लिली, चाइनीज सदाबहार, घृतकुमारी, गेरबेरा डेजी, गुलदाउदी, इंग्लिश आईवी, स्नेक प्लांट, रेफिस पाम, एरेका पाम के पौधों को यदि घर के अंदर रखा जाए तो यह वायु प्रदूषण काफी हद तक कम कर देते हैं।

ये पौधे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं। क्षय, चर्म, नेत्र और लीवर संबंधी रोगों को नियंत्रित करने में यह पौधे काफी कारगर साबित हो सकते हैं। विवि द्वारा प्रदेश के ऐसे तमाम क्षेत्रों में इंडोर प्लांट के 25-25 पौधे वितरित किए जाएंगे, जहां पर क्षय रोगियों की संख्या ज्यादा है ताकि बीमारियों को बढऩे से रोका जा सके। यदि विवि का यह परीक्षण सफल रहता है तो हिमाचल प्रदेश में क्षय रोगियों की संख्या कम हो सकती है।
डॉ. वाईएस परमार विवि नौणी पर्यावरण विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सतीश भारद्वाज का कहना है कि वायु प्रदूषण आकलन एवं पर्यावरण सुधार-क्षयरोग उपचार परिवेश पर काम किया जा रहा है। उम्मीद है कि भविष्य में इस प्रोजेक्ट के बेहतर परिणाम सामने आएंगे।

क्षय रोग की चपेट में हैं 16 हजार हिमाचली

हिमाचल प्रदेश में क्षय रोगियों की संख्या 16 हजार है। बीते एक दशक में क्षय रोगियों की औसतन संख्या करीब एक हजार तक बढ़ी है। आने वाले दिनों में भी क्षय रोगियों का आंकड़ा बढऩे की संभावना जताई जा रही है। चिंता की बात यह है कि करीब 500 रोगी ऐसे हैं जो कि एमडीआर की श्रेणी में आते हैं। यह रोगी क्षय रोग की वजह से मौत के बेहद करीब पहुंच गए हैं।

 

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