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हिमाचल दस्तक ब्यूरो। कुल्लू  : आईएनएसवी तारिणी टीम में शामिल लेफ्टिनेंट प्रतिभा जंबाल का कुल्लू पहुंचने पर स्वागत किया। इस दौरान लेफ्टिनेंट प्रतिभा जंबाल ने मीडिया के साथ अपनी  ऐतिहासिक यात्रा के अनुभव शेयर किए और यात्रा के बारे में संपूर्ण जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि 10 सितंबर 2017 को यह ऐतिहासिक नाविका सागर परिक्रमा यात्रा देश की रक्षा मंत्री निर्मला सीता रमण ने गोवा से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था और इस यात्रा में पहला पड़ाव 25 दिन के बाद न्यूजीलैंड पहुंचे और इस दौरान दक्षिणी प्रशांत महासागर में तूफान में 20 घंटे 30 मीटर लहरों के बीच समुंद्र के कई मुसीबतों का सामना किया। इसके साथ दूसरे पड़ाव में फिनलैंड के आयरलैंड में रूके और अस्ट्रिया में 15 दिन तक रूके इस दौरान वहां पर दिवाली मनाई और वहां पर कई कार्यशाला में हिस्सा लिया। उसके बाद साऊथ अफ्रीका में यात्रा का तीसरा पड़ाव था, जहां पर होली मनाई और वहां पर रह रहे भारतीयों से मिले।
उसके बाद वापिसी की यात्रा में मॉर्सिस में बोट का स्टेयरिंग टूट गया जिसके बार 7 घंटों तक बोट के स्टेयरिंग के खराब होने के बाद बावजूद मॉर्सिस में सात दिन के बाद रिपेयर बोट से यात्रा शुरू और 254 दिनों के बाद करीब 50,000 हजार किलोमीटर का सफर तय किया। इस दौरान तीन तूफानों में  52 घंटे जंग लड़ी और कई बार तूफानों में बीच बोट में पानी आने कई बार इलेक्ट्रिक इंजन बंद हुआ। उन्होंने कहा कि इस यात्रा को पूरा करना एक बड़ी चुनौती थी, जिससे टीम के सहयोग और केंद्र सरकार के सहयोग से पूरा किया गया। यह इंडियन नेवी एक बड़ी उपल्ब्धि है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक अच्छा प्रयास है और  इस उपलब्धि से देश के युवाओं के लिए एक प्रेरणा मिलगी।

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