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Jairam missed opportunity to invest

विशेष साक्षात्कार : मुकेश अग्रिहोत्री, नेता प्रतिपक्ष

कांग्रेस विधायक दल नेता के बाद देरी से नेता प्रतिपक्ष बने मुकेश अग्रिहोत्री के सामने एक ओर कांग्रेस विधायकों के हितों की लड़ाई लडऩे की जिम्मेदारी है तो दूसरी ओर वह खेमों में बिखरी कांग्रेस में भी संतुलन साध रहे हैं। पिछले एक साल से जयराम सरकार पर आक्रामक रहे नेता प्रतिपक्ष से ‘हिमाचल दस्तक’ ने इसके कारण जानना चाहे। पेश हैं राज्य ब्यूरो प्रमुख राजेश मंढोत्रा के साथ हुई बातचीत के अंश…

नेता प्रतिपक्ष बोले: जश्न में डूबी सरकार ने नहीं दिखाई उत्तराखंड जैसी होशियारी ,  हारे हुए लोगों के नाम उद्घाटन पट्टिकाओं पर लगाने के खिलाफ कोर्ट भी जाएंगे

राज्य में भाजपा सरकार को एक साल होने जा रहा है। सरकार के काम को आप कितने अंक देते हैं?

नई सरकार का ज्यादा समय जश्र और झूमने में ही निकल गया। कोई ऐसी विजनरी सोच सामने नहीं आई, जिससे राज्य को नई दिशा मिल पाती। वादे बहुत किए थे, पर धरातल पर एजेंडा सेट नहीं हुआ। 100 दिन के लक्ष्य बनाए गए, पर हुआ कुछ नहीं। मंत्री चौराहों पर लड़ रहे हैं। एक साल में सरकारी स्कूलों के बच्चों को वर्दी तक नहीं दे पाए। हमें कहते थे टायर्ड और रिटायर्ड की सरकार है। अब खुद रिइंप्लायमेंट दे रहे हैं। इस साल में केवल कर्मचारियों का तबादलों के नाम पर उत्पीडऩ हुआ है। तबादलों पर प्रतिबंध के बावजूद धड़ाधड़ उठापटक जारी है। इसी आदत ने सरकार के कामकाज को आकार नहीं लेने दिया।

सरकार ने ग्लोबल इन्वेस्टर मीट के जरिये 85000 करोड़ के निवेश का लक्ष्य रखा है। पूर्व उद्योग मंत्री रहते हुए आप इस लक्ष्य को किस रूप में देखते हैं?

औद्योगिक निवेश के लिए सरकार को प्रयास करने चाहिए, हमने भी किए थे। लेकिन प्रदेश सरकार इसमें भी मात खा गई। उत्तराखंड ने प्रधानमंत्री से अच्छे संबंधों का लाभ लेकर अपने यहां एक लाख करोड़ से ज्यादा के एमओयू करवा लिए। लेकिन ये इस साल ऐसा नहीं कर पाए। अब जून में मीट तो रखी है, पर ये अब दिल्ली में होने वाले बदलाव पर निर्भर है। वैसे मेरा मानना है कि नए निवेश से भी ज्यादा जरूरी अब पुराने उद्योगों का पलायन रोकना। जेएंडके और उत्तर पूर्वी राज्यों को पैकेज मिलने के बाद इंडस्ट्री शिफ्ट हो रही है।

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