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Junior Office Assistant recruitment gets green signal

हाईकोर्ट ने रोक हटाकर आयोग की मेरिट से भर्ती को कहा, साथ ही डिग्री-डिप्लोमा के झगड़े पर कमेटी बनाने के आदेश, पोस्ट कोड 556 समानांतर योग्यता वाले उम्मीदवार भी जेओए के लिए योग्य होंगे या नहीं? इसका निर्णय भी बाद में

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला : हाईकोर्ट ने जूनियर ऑफिस असिस्टेंट पोस्ट कोड 556 के पदों को हमीरपुर कर्मचारी चयन आयोग द्वारा तैयार की गई मेरिट के आधार पर भरने के लिए राज्य सरकार को हरी झंडी दे दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार मेरिट के अनुसार इन पदों को अनुबंध आधार पर भर सकती है।

खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि आयोग द्वारा जारी मेरिट के आधार पर जूनियर ऑफिस असिस्टेंट के पदों पर भर्ती स्टॉप गैप अरेंजमेंट होगी और यह मामले के अंतिम निर्णय पर निर्भर होगी। प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए कि वह दो सप्ताह के भीतर तीन से पांच सदस्यीय कमेटी का गठन करे जो कंप्यूटर शिक्षा में उच्च डिग्रियां व डिप्लोमा धारकों और भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत योग्यता प्राप्त उम्मीदवारों की समानता बारे निर्णय लेगी।

खंडपीठ ने अपने आदेशों में यह भी स्पष्ट किया कि समानांतर योग्यता रखने वाले उम्मीदवार भी जूनियर ऑफिस असिस्टेंट के पदों के लिए योग्य माने जायेंगे या नहीं? इसका निर्णय उचित समय पर लिया जाएगा। इससे पहले इस केस में प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने आदेश दिए थे कि जूनियर ऑफिस असिस्टेंट के पदों को भर्ती एवं पदोनती नियमों के तहत ही भरा जाए। ट्रिब्यूनल द्वारा पारित इस निर्णय को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए ट्रिब्यूनल द्वारा पारित निर्णय पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

1156 पदों की परीक्षा में 596 ही किए थे पास

कर्मचारी चयन आयोग ने शनिवार 23 फरवरी को जूनियर ऑफिस असिस्टेंट पोस्ट कोड 556 का अंतिम परिणाम करीब ढाई सालों बाद घोषित किया था। आयोग ने 1156 पदों के लिए ली गई इस परीक्षा में 596 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया था, जबकि शेष अभ्यर्थियों को अयोग्य घोषित कर दिया गया।

अयोग्य घोषित उम्मीदवारों ने प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के समक्ष आवेदय दायर कर आरोप लगाया था कि आयोग ने परिणाम बनाते समय न्यूनतम योग्यता की आड़ में कंप्यूटर शिक्षा में उच्च डिग्रियां व डिप्लोमा प्राप्त अभ्यर्थियों को अयोग्य घोषित कर दिया। आयोग ने विभिन्न संस्थाओं से मान्यता प्राप्त डिग्री व डिप्लोमा धारकों को भी बिना कारण अयोग्य घोषित कर दिया है।

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