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Kangra-Chamba is all new, so ...

कुछ भी ऐसा नहीं जो पुरानी लकीर पर चलता नजर आए,  कपूर जीते तो पहली दफा यहां से गद्दी नेता जाएगा लोस में

उदयवीर पठानिया। धर्मशाला : कांगड़ा लोकसभा क्षेत्र में सिर्फ लोकसभा चुनाव की रिवायत ही पुरानी है, बाकि सब नया है। भाजपा ने पहली दफा गद्दी समुदाय पर अपनी आस की डोर रखी है। कांग्रेस ने भी अपने कथित मुख्यमंत्री बनने की कुब्बत रखने वाले नेताओं को दरकिनार करके भाजपा की किताब से निकले पवन काजल को कांग्रेसी किताब का कवर फेस बनाया है। कुछ भी ऐसा नहीं है जो पुरानी लकीर पर चलता नजर आए।

टिकट के मामले से ही भाजपा मैदान में फ्रंट फुट पर चलना शुरू हुई थी और यही वजह रही कि प्रचार-प्रसार में भी आगे रही। दरअसल, कांगड़ा लोकसभा क्षेत्र में टिकट निर्धारण में कांग्रेस के भीतर जंग काफी अरसे तक कांगड़ा के उन नेताओं के बीच चलती रही जो विधानसभा चुनावों में बाहर हो गए थे। जीएस बाली और सुधीर शर्मा की खींचतान के बीच टिकट खूब लटकी और बाद में सिर्फ सवा साल पहले कांग्रेसी बने पवन काजल के खाते में डाली गई। जबकि इससे ठीक उल्ट भाजपा ने टिकट को बिना किच-किच फाइनल करके गद्दी समुदाय के सरकार में कबीना मंत्री रहे किशन कपूर को थमा दी।

प्रचार में भी भाजपा फ्रंट फुट पर आ गई। बावजूद इसके लेट मैदान में उतरी कांग्रेस ने ओबीसी समुदाय के काजल को चेहरा बना कर बिरादरी के वोट बैंक से आगे बढऩे में ताकत झोंक दी। चुनाव प्रचार अभियान में जहां भाजपा हर प्लेटफार्म पर एकजुट नजर आई तो कांग्रेस के खाते से ऐसी खबरें अक्सर हावी होती रहीं कि काजल के पलड़े में कांग्रेस काडर की जगह कांग्रेस के बड़े नेता ही ‘भारी’ पड़ रहे हैं। जबकि भाजपा में मंत्री पद पाने और बचाने की कवायदों में भाजपा को एक्स्ट्रा पॉवर मिलने की खबरें भी खूब छाईं रहीं। यानि भाजपा में चाहतों और डर के समावेश ने पूरे प्रचार अभियान में पूरा जलवा दिखाया।

जबकि कांग्रेस में भाजपा से हिसाब बराबर करने की जगह आपस के हिसाब-किताब के बही-खाते ज्यादा खुले। ऐसे में अब यह देखना रोचक रहेगा कि कांगड़ा में जब सब नया है तो जाहिर सी बात है कि नतीजा भी नयापन लिए ही आएगा। कपूर जीते तब भी नया ही होगा, पहला यह कि उनके दिल्ली जाने से कांगड़ा के खाते से कोई और नया मंत्री बनेगा, गद्दी पहली दफा यहां से लोकसभा मे प्रवेश करेगा। काजल जीते तब भी नयापन आएगा। कांगड़ा से भी कोई नया चेहरा विधानसभा में जाएगा। धर्मशाला से कपूर जीते तब भी विधानसभा में चेहरा बदल जाएगा। मतदान में 23 मई के नतीजे कम से कम नयापन तो सामने लेकर आएंगे ही।

अपने आखिरी चुनाव में शांता को मिली थी 170072 मतों की लीड

पिछले लोकसभा चुनाव की बात करें तो भाजपा के शांता कुमार और कांग्रेस के चंद्र कुमार में मुकाबला हुआ था। इन चुनाव में शांता कुमार को 456163 मत मिले थे और कांग्रेस के चंद्रकुमार को 286091 मत हासिल हुए थे। इस चुनाव में शांता कुमार 170072 मतों से विजयी हुए थे।

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