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 नशे में धुत्त था जब जंगल में अकेली मिली लड़की ,  गुडिय़ा पर थूका, वह भड़की तो हाथापाई भी हुई , लोअर कोर्ट में चार्जशीट दायर, सुनवाई 27 को

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला : सीबीआई ने बहुचर्चित कोटखाई के गुडिय़ा प्रकरण में आखिर चार्जशीट दायर कर दी। मंगलवार के जांच एजेंसी ने हाईकोर्ट में भी इसकी एक प्रति सौंपी।

इसमें कांगड़ा के मुल्थान के रहने वाले अनिल कुमार उर्फ नीलू को एकमात्र आरोपी बनाया गया है, जो जंगलों में इमारती लकड़ी काटने यानी चरानी का काम करता है। सीबीआई ने उच्च न्यायालय को बताया कि सक्षम न्यायालय के समक्ष यह रिपोर्ट ट्रायल हेतु आज ही दाखिल की जा रही है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने अब इस मामले पर सुनवाई 27 जून के लिए निर्धारित की।

चार्जशीट के मुताबिक अनिल कुमार चरानी का काम करता है। उसने ही 4 जुलाई, 2017 को स्कूल के घर जा रही अकेली लड़की गुडिय़ा से दुष्कर्म किया और बाद में उसका गला घोंटकर उसे मौत के घाट उतार दिया। यह अपराध उसने अकेले अंजाम दिया। जांच के दौरान इस बात का भी खुलासा हुआ कि हलाइला के जंगल से अकेली गुजर रही गुडिय़ा पर नशे में धुत्त आरोपी ने पहले थूका। इसका गुडिय़ा ने जोरदार विरोध किया और दोनों के बीच हाथापाई भी हुई।

चार्जशीट में यह बताया गया है कि अनिल उर्फ नीलू आदतन अपराधी है। उसके खिलाफ वर्ष 2015 में पच्छाद के पुलिस स्टेशन सराहां, जिला सिरमौर में भारतीय दंड संहिता की धारा 307, 354, 326, 323 और 324 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उसे 14 जुलाई, 2016 को इस मामले में हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। उसके पश्चात वह फरार था। नीलू के खिलाफ यह भी आरोप है कि उसने 5 और 6 जुलाई, 2017 की रात को भी एक अन्य युवती से दुष्कर्म का प्रयास किया था। सीबीआई ने चार्जशीट में वे फॉरेंसिक सबूत भी लगाए हैं, जिनसे यह साबित हुआ कि नीलू चरानी ही हत्यारा है।

पुलिस एसआईटी को दिए बयानों से मुकर गए लोग

एसआईटी द्वारा पकड़े गए एक आरोपी सूरज की 19 जुलाई की रात को कोटखाई थाना में पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि जिन 2 लोगों के बयानों के आधार पर पुलिस ने इन 5 लोगों को हिरासत में लिया था। सीबीआई की जांच के दौरान ये दोनों अपने बयान से मुकर गए। इन आरोपियों के पॉलीग्राफ टेस्ट, नारको एनालिसिस रिपोर्ट, ब्रेन इलेक्ट्रिकल ओसीलेशन सिग्नेचर प्रोफाइलिंग और कंप्रीहेंसिव फॉरेंसिक साइकोलॉजिकल रिपोर्ट से भी इस बात का खुलासा हुआ कि इन लोगों को गलत तरीके से हिरासत में लिया गया था।

बेरहम दरिंदे ने 4 जुलाई को ही मार दिया था गुडिय़ा को

गुडिय़ा 4 जुलाई को स्कूल से घर आती बार लापता हुई थी। हालांकि उसका शव जंगल में 6 जुलाई, 2017 को मिला था। चार्जशीट कहती है कि नीलू ने 4 जुलाई को ही रेप कर गुडिय़ा को मार दिया था। उसने शव को भी वहीं रहने दिया, जहां इस वारदात को अंजाम दिया। इस स्थान पर उसने देसी शराब भी पी। इस बोतल और गुडिय़ा के शव से मिले डीएनए भी मैच कर गए हैं। 13 अप्रैल, 2018 को सीबीआई ने लीनिएज डीएनए मैचिंग का इस्तेमाल करने के बाद नीलू को रोहडू के हाटकोटी से पकड़ा था। इसके लिए फोन टैप करने पड़े, क्योंकि वह मोबाइल नहीं रखता था।

पुलिस ने जिन्हें पकड़ा, उन्हें डिस्चार्ज करने को कहा

इस केस में पुलिस की एसआईटी ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर 5 लोगों को हिरासत में लेने का दावा 13 जुलाई, 2017 की प्रेस कांफें्रस में किया था। जबकि सीबीआई ने चार्जशीट में कहा है कि 13 जुलाई तक कोई फॉरेंसिक साक्ष्य पुलिस के पास नहीं थे। सीबीआई ने पुलिस द्वारा घोषित आरोपियों में आशीष चौहान, राजेंद्र सिंह उर्फ राजू, सुभाष, लोकजन उर्फ छोटू और दीपक उर्फ दीपू को इस मामले के लिए दोषी न पाते हुए उन्हें आपराधिक सहिंता प्रक्रिया की धारा 169 के तहत डिस्चार्ज करने का आग्रह कोर्ट से किया है। ये सभी अभी जमानत पर हैं।

आरोपी पुलिस वालों को नहीं मिली राहत

शिमला। गुडिय़ा रेप और मर्डर केस से जुड़े पुलिस लॉकअप हत्याकांड मामले में पूर्व आईजी जहूर जैदी, पूर्व एसपी डीडब्ल्यू नेगी, डीएसपी मनोज जोशी सहित अन्य 9 पुलिस कर्मियों की न्यायिक हिरासत फिर बढ़ गई है। सभी आरोपियों की न्यायिक अवधि मंगलवार को पूरी होने पर अदालत में पेश किया गया। जहां से उन्हें 2 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इस मामले में सीबीआई ने एसआईटी के सभी 8 सदस्यों को बीते वर्ष 29 अगस्त को गिरफ्तार किया था। इसके बाद जांच एजेंसी ने बीते वर्ष 16 नवंबर को जिला शिमला के पूर्व एसपी डीडब्ल्यू नेगी को गिरफ्तार कर लिया था। नेगी को छोड़ जांच एजैंसी सभी के वॉयस सैंपल भी ले चुकी है। लेकिन अभी तक रिपोर्ट नहीं आई।

 

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