जिले के तेजतर्रार नेता अब जबरन छुट्टियों पर ,  राजनीति में हालात बदले तो कई दिग्गज बैठ गए घर

राजीव भनोट  :  लोकसभा चुनाव धीरे-धीरे अपनी सरगर्मियों की ओर बढ़ते चले जा रहे हैं। नेताओं के दौरे, प्रत्याशियों के भाषण, समर्थकों के नारे गूंज रहे हैं।

इसी बीच जिला ऊना के कई राजनीतिक चेहरे ऐसे हैं, जिनकी राजनीति में कभी तूती बोलती थी, पर आज कहीं गुमनामी के अंधेरों में खो से गए हैं। कुछ को परिस्थितियों ने राजनीतिक रूप से चुप करवा दिया तो कुछ अपनी गलतियों के चलते राजनीति के पायदान से फिसल कर पीछे हो गए। इनमें कुछ नेता अब सक्रिय होने का रास्ता ढूंढ भी रहे हैं, पर मिल नहीं रहा। कुछेक नेता सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और कुछ ने अपने आपको सामाजिक सर्किल व पारिवारिक दायरे में ही जीवन को समेट लिया है…

“ऊना सदर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक ओपी रतन काफी सक्रिय रहे और जिले ही नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी उफान लाने वाले नेताओं में उनकी गिनती होती है। जब वे सीधे वीरभद्र सिंह जैसे कद्दावर नेता से भिड़ गए और वीरभद्र के विरोधी खेमे में शामिल होकर ऊना की आवाज को तो रतन ने उठाया, पर राजनीति के दांवपेच का उन्हें खुद को ही नुकसान उठाना पड़ा। दलबदल उन्हें रास नहीं आया। अब ओपी रतन राजनीति में फिलहाल अपनी कोई राय नहीं रखते।”

“चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र से ही ओबीसी के बड़े चेहरे रहे गणेशदत्त भरवाल कांग्रेस के लीडर रहे। लेकिन राजनीति में कुछ कदम ही चल पाए। जिले में ओबीसी वर्ग का बड़ा चेहरा होने के बावजूद ज्यादा देर तक पहली पांत में खड़े नहीं हो पाए।”

 

“कुंगड़त से ही विजय जोशी के चाचा कश्मीरी लाल जोशी भाजपा की प्रथम पंक्ति के नेता रहे। टिकट न मिलने पर दल भी बदला, पर राजनीति के पायदान पर फिसलते ही रहे। उन्होंने अपनी राजनीतिक स्थितियों को ऐसा डावांडोल किया कि अब भगवा धारणकर भजन-कीर्तन तक सीमित हो गए हैं।”

“चिंतपूर्णी हलके से ही धूमल सरकार में मंत्री रहे प्रवीण शर्मा चाहे चुनावी राजनीति से दूर हुए, लेकिन अपनी सक्रियता के चलते संगठन में अपनी कदमताल को कमजोर नहीं पडऩे दिया। प्रवीण शर्मा एक ऐसे चेहरे हैं जो संगठन की राजनीति में अपनी सक्रियता दिखा रहे हैं। आज प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष भी हैं।”

 

“हरोली से ही प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष जय किशन शर्मा, जो विधायक भी रहे। एक सड़क दुर्घटना के बाद अपने घर से ही सामाजिक जीवन को आगे बढ़ा रहे हैं। उनकी नजर चाहे हर काम पर रहती है, लेकिन राजनीति में कभी कमांड करने वाले अब पार्टी में ही पूछ के मोहताज होकर रह गए हैं।”

“कुटलैहड़ विधानसभा हलके से पूर्व विधानसभा के उपाध्यक्ष रहे पंडित रामनाथ शर्मा कभी वीरभद्र दरबार के अहम अंग रहे, लेकिन एक चुनाव में टिकट कटने के बाद दलबदल किया। फिर कांग्रेस में वापसी तो की, लेकिन दोबारा राजनीति में स्थापित नहीं हो पाए। वे सक्रिय राजनीति से अपने कदम पीछे खींच चुके हैं।”

 

“चिंतपूर्णी हलके से शांता सरकार के समय भाजपा की विधायक रही सुषमा शर्मा भी वर्षों से राजनीति की अग्रिम पंक्ति में अपनी जगह तलाश रही हैं। आज सुषमा भाजपा के कुछ कार्यक्रमों में महज हाजिरी दर्ज कराने तक सीमित हैं।”

 

“हरोली हलके की सियासत की राजधानी कभी कुंगड़त हुआ करती थी। यहां से विजय कुमार जोशी सबसे कम उम्र के विधायक बने, मंत्री भी रहे। सियासत में वीरभद्र सिंह विरोधी धड़े के साथ रहे और बीच में दलबदल हुआ पर राजनीति में उनके पांव ऐसे उखड़े की दोबारा लग नहीं पाए। फिर सक्रिय राजनीति से ही दूर हो गए। अब सोशल मीडिया पर अपनी बात कभी-कभार रखते जरूर हैं। मूल रूप से कांग्रेसी विचारधारा से हैं।”

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