2010 में सरकार की मंजूरी के बिना भर्तियों पर रोक लगाई थी सरकार ने , 2015 में सहकारिता सचिव ने सरकार से पूछे बिना अपने स्तर पर हटा दी रोक , वीरभद्र के सुरक्षा अधिकारी के बच्चे भर्ती करने की शिकायत पर फाइल खुली

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला : पूर्व कांग्रेस सरकार के समय राज्य के सहकारी बैंकों में हुई भर्तियों की जांच खुल गई है। नया खुलासा ये हुआ है कि इन विवादित भर्तियों का रास्ता 2010 में सरकार की ओर से लगाई गई रोक को तत्कालीन सहकारिता सचिव द्वारा अपने स्तर पर ही हटाकर खोला गया। ये रोक 2015 में हटाई गई, जिसमें सरकार से अनुमति नहीं ली गई।

यही सहकारिता सचिव बाद में मुख्य सचिव भी बने। अब वह जांच के दायरे में हैं। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भर्ती पर रोक हटाने के लिए ये आवेदन 2015 में शिमला के कृषि एवं ग्रामीण विकास सहकारी बैंक की ओर डलवाया गया। सहकारिता सचिव ने सरकार को पूछे बिना इसी आधार पर 2015 को जारी निर्देश वापस ले लिये। इसके बाद ही राज्य सहकारी बैंक और कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक में भी भर्तियां हुईं। ये भर्तियां किसी ने शिक्षा बोर्ड से करवाई तो किसी ने प्रदेश विवि को काम दिया।

इस मामले में राज्य सरकार को दरअसल पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पीएसओ रहे एक अधिकारी के बच्चों को गलत तरीके से बैंकों में भर्ती करने संबंधी शिकायत मिली थी। भाजपा चार्जशीट में भी ये आरोप लगाए गए थे। इन्हें वेरिफाई करने के लिए जब आरसीएस के पास भेजा गया तो पता चला कि इन भर्तियों का रास्ता खोलना एक सुनियोजित प्रक्रिया थी। फाइल अब आरसीएस से होते हुए मुख्य सचिव को आ गई है और विजिलेंस को जांच के लिए भेजने से पहले मुख्यमंत्री कार्यालय से आदेश लेने को भेजी गई है। इसके बाद इस मामले में एफआईआर दर्ज होगी।

अब भी फंसी है केसीसी बैंक की भर्ती

इन्हीं विवादित भर्तियों में केसीसी बैंक की भर्ती भी है, जो पूर्व चेयरमैन जगदीश सिपहिया ने स्कूल शिक्षा बोर्ड से करवाई थी। भाजपा सरकार बनने के बाद से इस भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थियों की नियुक्ति अब तक नहीं हो पाई है। अब ये संभव है कि ये भर्ती भी इस केस में उलझ जाए। ये भी जांच के दायरे में है कि केसीसी ने शिक्षा बोर्ड को ही क्यों चुना? इसमें तत्कालीन शिक्षा बोर्ड चेयरमैन का क्या रोल था?

 

Comments

Coming soon

Career Counsling

Get free career counsling and pursue your dreams