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मंदिरों का सर्वेक्षण करने के लिए एएसआई के डीजीपी से बात ,  कहा, एक सप्ताह के भीतर हो मंदिरों का सर्वेक्षण

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। बिलासपुर  : बिलासपुर में भाखड़ा बांध के निर्माण के उ परांत गोविन्द सागर झील में जल मग्न हुए प्राचीन मंदिरों के अब शीघ्र पुनर्रस्थापन की आशा की किरण जग उठी है। इसी के चलते शनिवार सुबह भाषा एवं संस्कृति विभाग की सचिव डॉ पूर्णिमा चौहान ने जल मग्न हुए प्रचीन मंदिरों का दौर कर निरीक्षण किया।

उसके उपरान्त उन्होंने उस स्थान का भी निरीक्षण किया जिस स्थल का जिला प्रशासन ने प्रचीन मंदिरों के अवशेषों को पुन: स्थापित करने का चयन किया है। इस दौरान डॉ पूर्णिमा चौहान ने मंदिरों के पुर्नस्थापन के मुददे के महत्व को देखते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के डीजी से दूरभाष पर बातचीत की व उन्हें इन मंदिरों की पूरी वस्तुस्थिति से अवगत करवाया। उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के डीजी से दूरभाष पर कहा कि एक सप्ताह के भीतर ही गोविन्द सागर झील में जल मग्न हुए प्रचीन मंदिरों के अवशेषों के पुनर्रस्थापन के प्रति टीम भेजी जाए नहीं तो बरसाती मौसम के कारण गोविन्द सागर झील में पानी भर जाएगा। जिससे सर्वेक्षण करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। हालांकि इस निरीक्षण के दौरान हल्की -हल्की बारिश की झड़ी भी लगी हुई थी ।

मगर डॉ पूर्णिमा चौहान ने हाथों में छाता लेकर कीचड़ होने के बावजूद बिना किसी परवाह के निरीक्षण किया। उन्होंने उसके बाद उन्होंने पुनर्रस्थापन वाले स्थान का भी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंनेकहा कि गोविन्द सागर झील में जल मग्न हुए प्रचीन मंदिरों के अवशेषों का शीघ्र पुनर्रस्थापन करना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि यह प्राचीन स यता एवं संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। भावी पीढिय़ों को इनके संरक्षण से प्रचीन स यता एवं संस्कृति को जानने का अवसर प्रदान होने के साथ -साथ पर्यटन को भी बढावा मिलेगा। इसके अलावा भाखड़ा बाँध के निर्माण से विस्थापित हुए परिवारों को भी अतीत में उनकी श्रद्धा का केंद्रबिंदु रही प्राचीन ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण से उन्हें हर्ष होगा। इस निरीक्षण के दौरान जिला बिलासपुर की भाषा अधिकारी नीलम चंदेल व अन्य कर्मचारियों ने भाग लिया। निरीक्षण के उपरान्त डॉ पूर्णिमा चौहान अपने तय मंडी – कुल्लू जिलों के लिए रवाना हो गई।

क्या है गोविन्द सागर झील में जल मग्न हुए प्रचीन मंदिरों के पुनर्रस्थापन का मामला

गोविन्द सागर घाट सुधार सभा बिलासपुर कई बार पूर्व में आरोप लगा चुकी है कि पर्यटन की दृष्टि से बिलासपुर पूर्ण रूप से पिछड़ चुका है जबकि बिलासपुर पंजाब ,हरियाणा, दिल्ली आदि राज्यों का केंद्र कबंदु है। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए एक सूचनाकेन्द्र तक उपलब्ध नहीं है इसके अलावा तेहरवीं शताब्दी पूर्व प्राचीन मंदिरों के पुनर्रस्थापन में विफल प्रशासन रहा। वर्ष १९६० के दशक में भाखड़ा बांध अस्तित्व आया उस दौरान तत्कालीन बिलासपुर शहर जलमग्न हो गया था।

तत्कालीन केंद्र सरकार ने बिलासपुर की जनता को आश्वाशन दिया था कि प्राचीन सभ्यता व संस्कृति से जुडी धरोहरों व मंदिरों के अवशेषों को नए बिलासपुर शहर में संजोकर रखा जाएगा, मगर तेहरवीं शताब्दी पूर्व प्राचीन मंदिरों के पुनर्विस्थापन के प्रति धरातल पर कुछ भी नहीं हो सका। गोविन्द सागर घाट सुधार सभा बिलासपुर के अध्यक्ष राम सिंह ठाकुर ने सरकार से मांग है कि बिलासपुर में पर्यटन को बढाने की दृष्टि से सकारात्मक कदम उठाए जाएं व प्राचीन स यता एवं संस्कृति से जुड़े तेहरवीं शताब्दी पूर्व प्राचीन मंदिरों के अवशेषों का पुनर्रस्थापन करवाया जाए।
अनूप शर्मा
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