Shimla Kalaka

Shimla Kalaka : शिमला : पर्यटन के लिहाज से हिमाचल प्रदेश के सर्वाधिक प्रमुख आकर्षणों में से एक कालका शिमला रेलवे की रफ्तार एवं विस्तार के मार्ग में यूनेस्को से इसे मिला विश्व धरोहर का दर्जा आड़े आया है क्योंकि इसके मूल स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।

साल 1903 में स्थापित शिमला कालका रेल इस वर्ष 115 वां वर्ष पूरा कर रही है और इस रेल लाइन के विद्युतीकरण की जरूरत 97 वर्ष पहले 1921 में उत्तर पूर्व रेलवे के तत्कालीन लोको अधीक्षक टी एफ स्टोन ने जताई थी। लेकिन तब से अब तक किसी न किसी वजह से यह प्रस्ताव फाइल से बाहर नहीं निकल पाया है। स्टोन ने तब अपने श्रृंखलाबद्ध लेखों में कहा था कि कालका शिमला रेलवे का विद्युतीकरण एक व्यवहार्य प्रस्ताव है।
इस बारे में पूछे जाने पर मंडल रेल प्रबंधक :अंबाला: दिनेश शर्मा ने “भाषा से कहा कि कालका शिमला रेलखंड विश्व धरोहर स्थल है। इसके कारण हम इसके मूल स्वरूप में कोई बदलाव नहीं कर सकते हैं और कोई नया निर्माण भी नहीं कर सकते हैं। हमें इस धरोहर को सहेज कर रखना है और हम इस दिशा में पूरा प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाप के इंजन के बाद यहां डीजल इंजन से परिचालन हो रहा है।”
शर्मा ने बताया कि इस रेलखंड के 115 वर्ष पूरे होने और विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के 10वें वर्ष में कई कार्यक्रम रखे गए हैं जिसमें शिमला से शोधी तक पुराने भाप इंजन से ज्वाय राइड शामिल हैं। भाप इंजन से ज्वाय राइड का कार्यक्रम खास तौर पर छुट्टियों में रखा गया है। जनवरी में इसे चलाया गया और अब गर्मी की छुट्टी के दौरान दो महीने चलाने का कार्यक्रम है। उल्लेखनीय है कि साल 1921 में स्टोन ने सुझाव दिया था कि कालका शिमला रेलवे का विद्युतीकरण एक वित्तीय प्रस्ताव है बशर्ते बिजली लागत एक आना प्रति यूनिट हो। तब इस सुझाव को रेलवे के समक्ष तकनीकी पेपर के रूप में भी रखा गया था। इसमें कहा गया कि रेलगाड़ी को चलाने के लिए बिजली या ऊर्जा के स्रोत का जहां तक संबंध है , यदि भाखड़ा बांध परियोजना कार्यान्वित होती है तो यह कालका ट्रांसमिशन प्रणाली के 50 मील के दायरे में होगा। इसके फलरूवरूप कालका में सस्ती बिजली ऊर्जा प्राप्त करना संभव हो सकेगा और इस प्रकार ईधन बिल पर काफी कमी आएगा।

इस रेलखंड के निर्माण के लिए 1889 में दिल्ली अंबाला कालका रेलवे कंपनी का पंजीकरण किया गया था। करीब 96 किलोमीटर लम्बे शिमला कालका रेलखंड को नवंबर 1903 में यातायात के लिए पूरी तरह से खोल दिया गया था। रेलवे के दस्तावेजों के अनुसार, उच्च पूंजी लागत और रखरखाव के खर्च के कारण कालका शिमला रेलवे का यात्री किराया मैदानी इलाकों की तुलना में अधिक रखने की अनुमति दी गई। गंभीर वित्तीय संकट की स्थिति के कारण कंपनी के आवेदन पर सरकार ने इस रेल लाइन को खरीदने का निर्णय किया था।
शिमला कालका रेलवे के पूरे मार्ग का प्राकृतिक दृश्य बहुत ही मनोहारी है, चारों ओर उंचे पहाड़ों के बीच सूर्य की रोशनी में रेल की पटरियां चांदी के धागों की तरह झ्ािलमिलाती हैं।
सर एडवर्ड जे बक ने अपनी पुस्तक शिमला : पास्ट एंड प्रेजेंट में लिखा कि कालका शिमला रेलखंड के निर्माण के दौरान 107 सुरंगें थीं जिनकी कुल लम्बाई करीब 5 मील थी। 1930 के अंकन के दौरान कुछ सुरंगों को समाप्त किया गया और अभी इसकी संख्या 102 है।
कालका शिमला रेल लाइन रेल इंजीनियरिंग का अपूर्व उदाहरण है। इसमें एक रोचक तथ्य यह है कि इसमें गार्टर का पुल नहीं है, बल्कि मल्टी आर्च गैलरी जैसे पुराने रोमन जलसेतु को पहाड़ी खड्ड के बीच लाइन बिछाने में उपयोग किया गया है। रेलखंड में 1906 से उपयोग किए जा रहे के सी 520 वाष्प इंजन को आज भी मांग के आधार पर चलाया जाता है।
रेल अधिकारियों का कहना है कि फिल्मों की शूटिंग के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है।

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