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Shri Nayana Devi Shri Anandpur Sahib will be formed soon

चंडीगढ़ में हुई रोप-वे कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक, हिमाचल व पंजाब मिलकर बनाएंगे 210 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला : हिमाचल व पंजाब सरकार की कवायद सिरे चढ़ी तो शीघ्र ही श्री नयनादेवी व श्री आनंदपुर साहिब के बीच रोपवे का सपना साकार हो जाएगा। 210 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के इस प्रोजेक्ट को हिमाचल व पंजाब की सरकारें मिलकर बना रही हैं। रोप-वे बन जाने से यहां दोनों क्षेत्रों में धार्मिक पर्यटन को पंख लगेंगे।

रोपवे निर्माण को लेकर मंगलवार को हिमाचल प्रदेश व पंजाब दोनों राज्यों के संयुक्त उपक्रम में गठित ‘श्री नयनादेवी जी और श्रीआनंदपुर साहिब जी रोपवे कंपनी प्राइवेट लिमिटेड’ के निदेशक मंडल की पहली बैठक चंडीगढ़ के पंजाब भवन में हुई। इसमें हिमाचल प्रदेश की ओर से अतिरिक्त मुख्य सचिव (पर्यटन) राम सुभग सिंह, निदेशक पर्यटन अमित कश्यप व अतिरिक्त निदेशक मनोज शर्मा और पंजाब सरकार की तरफ से अतिरिक्त मुख्य सचिव बिन्नी महाजन, प्रधान सचिव (पर्यटन) विकास प्रताप, प्रधान सचिव (वित्त) अनिरुद्ध तिवारी, निदेशक पर्यटन मलविंदर सिंह जग्गी व आईआरएसई के प्रबंध निदेशक व मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनूप शामिल हुए।

इस प्रोजेक्ट के लिए गठित की गई संयुक्त उपक्रम कंपनी के निदेशक मंडल में 5 निदेशक हिमाचल प्रदेश सरकार और पांच निदेशक पंजाब सरकार द्वारा मनोनीत किए गए हैं। इसमें शुरुआती पूंजीगत निवेश में 50-50 लाख रुपये की राशि दोनों राज्यों द्वारा जमा करवाई जा रही है। निदेशक मंडल की बैठक में इस बारे कंपनी के अधिकारियों द्वारा अपनी प्रस्तुति भी दी गई।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना में दोनों राज्यों के पर्यटन विभाग नोडल एजेंसी के रूप में काम कर रहे हैं। रोपवे प्रोजेक्ट को आगामी अढ़ाई वर्ष के भीतर इसे पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए मैसर्ज इंडियन पोर्ट रेल कार्पोरेशन लिमिटेड ने फ्री फिजिबिलिटी स्टडी भी की है।

श्रद्धालुओं को मिलेगा फायदा

रोपवे के निर्माण से प्रमुख शक्तिपीठ श्री नयनादेवी जी तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को अब चढ़ाई नहीं चढऩी पड़ेगी और श्रद्धालु आराम से श्री नयनादेवी के दर्शन कर सकेंगे। श्री नयनादेवी मंदिर में शीश नवाने 80 प्रतिशत श्रद्धालु पंजाब से आते हैं। पिछले साल भी करीब 25 लाख श्रद्धालुओं ने यहां माथा टेका था।

2012 से शुरू हुई थी कवायद  इस महत्वाकांक्षी

प्रोजेक्ट के लिए वर्ष 2012-13 में कवायद शुरू हुई थी और इसके लिए 14 एकड़ जमीन भी अधिकृत की गई, लेकिन तब इसका निर्माण नहीं हो पाया था। अब पिछले साल 28 सितंबर को चंडीगढ़ में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति में इस प्रोजेक्ट के एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे।

 

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