subhash park

पार्क से सुभाष पार्क बनने की कहानी

हिमाचल दस्तक।। जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन के उद्घाटन के बाद पुरानी दिल्ली में जिस नेताजी सुभाष पार्क के पुनर्निर्माण का काम आरंभ हुआ है उसका मूल रूप से उद्घाटन तत्कालीन प्रिंस ऑफ वेल्स ने वर्ष 1922 में ऑल इंडिया एड्वर्ड मेमोरियल के रूप में किया था। लाल किले और इसके पास स्थित जामा मस्जिद के निकट पांच एकड़ से अधिक के क्षेत्र में फैले शानदार हरे भरे पार्क में उस समय तोड़ फोड़ की गई थी जब कश्मीरी गेट तक मेट्रो की वायलेट लाइन का विस्तार किया जा रहा था।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की शानदार प्रतिमा को आजाद हिंद फौज में उनके साथियों ने स्थापित किया था। इस प्रतिमा को सुरंग बनाने एवं अन्य निर्माण कार्यों के लिए वहां से हटा दिया गया था। इसे नगर पालिका पार्क में फिर से स्थापित किया गया था। उत्तर दिल्ली की महापौर प्रीति अग्रवाल ने कहा, पार्क के पुनर्निर्माण का काम जारी है और हम इसे पूरा होने की अंतिम समय सीमा तय करने के लिए डीएमआरसी प्राधिकारियों के साथ बैठक करेंगे।

उत्तर दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) के तहत आने वाला यह पार्क भले ही आज स्वतंत्रता एवं देशभक्ति का प्रतीक समझा जाता है लेकिन यह मूल रूप से ब्रिटेन के महाराज एड्वर्ड 7 का स्मारक था और उनकी प्रतिमा इस स्मारक में आकर्षण का केंद्र थी। 84 वर्षीय लेखक एवं फोटो पत्रकार ध्रुव एन चौधरी के जेहन में अब भी एड्वर्ड पार्क की याद ताजा है। उन्होंने कहा, इतिहास को आंकना नहीं चाहिए। औपनिवेशिक शासन भारत का इतिहास है और इसे लेकर शर्मिंदगी महसूस नहीं करनी चाहिए।

यह प्रतिमा कला एवं शिल्प का शानदार नमूना थी और आधुनिक पीढ़ी को इसे देखने का अवसर मिलना चाहिए था। इसे किसी संग्रहालय में संरक्षित किया जाना चाहिए था। एड्वर्ड की पांच टन की विशाल प्रतिमा में महाराज घोड़े पर बैठे हैं और उन्होंने फील्ड मार्शल की पूरी वर्दी पहन रखी है और बाएं हाथ में एक हैट पकड़ी हुई है। इस प्रतिमा को लंदन में बकिंघम पैलेस के सामने क्वीन विक्टोरिया मेमोरियल के डिजाइनर सर थॉमस ब्रॉक ने डिजाइन किया था। इसे इंग्लैंड से भारत लाया गया था।

जाने माने लेखक नीरद सी चौधरी के बेटे चौधरी ने कहा, मैंने 1950 के दशक के अंत तक इसे देखा। मैंने 1955 में इसकी तस्वीर भी ली थी। मेरा मानना है कि 1960 के दशक में इसे हटाकर बुरारी में कोरोनेशन पार्क में ब्रितानी शासन काल की अन्य प्रतिमाओं के साथ फेंक दिया गया था। इस पार्क का उद्घाटन फरवरी 1922 में महाराज एड्वर्ड 7 के बेटे प्रिंस ऑफ वेल्स एड्वर्ड 8 ने भारत के अपने शाही दौरे में आल इंडिया किंग एड्वर्ड मेमोरियल के रूप में किया था।

फ्रेडेरिक ब्रॉक की पुस्तक थॉमस ब्रॉक: फोरगेटन

स्कल्प्चर ऑफ द विक्टोरिया मेमोरियल  के अनुसार इस प्रतिमा को 1969 में टोरंटो ले जाकर महारानी के पार्क में स्थापित किया गया। इस पार्क का उद्घाटन स्वयं एड्वर्ड 7 ने 1860 में किया था जब वह प्रिंस ऑफ वेल्स थे। भारत में ब्रिटेन के शासन के समापन के साथ ही एड्वर्डपार्क की पहचान भी खो हो गई है। कभी ब्रिटेन के शासन और भारत की गुलामी की याद दिलाता यह पार्क अब सुभाष चंद्र बोस की देशभक्ति और आजाद भारत का प्रतीक बन गया है।

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