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 5 साल बाद छुट्टियां रेगुलर करने के मामले देखकर शिक्षा सचिव भड़के , निदेशकों को कहा, ऐसी छुट्टी करने वालों की यह अवधि डाइज-नॉन करो

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला : पिछले कई वर्षों से ट्रांसफर या अन्य मामलों में बिना मंजूरी छुट्टी गए शिक्षकों की जिम्मेदारी तय करने के लिए आदेश जारी हुए हैं। शिक्षा सचिव डॉ. अरुण शर्मा ने उच्च और प्रारंभिक शिक्षा निदेशकों को लिखित आदेश भेजे हैं कि बिना पूर्व अनुमति के छुट्टी करने वाले शिक्षकों के खिलाफ सर्विस रूल्स के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

यह अनुशासनात्मक कार्रवाई निदेशालय स्तर पर होगी और इसकी रिपोर्ट शिक्षा सचिव को भेजनी जरूरी होगी। दरअसल, सचिवालय में 5 साल पहले की छुट्टियां रेगुलर करने के मामले आ रहे थे। इन्हें देखकर शिक्षा सचिव भड़क गए। रिकार्ड देखने पर पता चला कि ये सभी छुट्टियां बिना पूर्व अनुमति के की जा रही हैं और विभाग भी बाद में बिना किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई के इन्हें रेगुलर कर रहा है।

शिक्षा सचिव ने निदेशकों से कहा है कि ऐसी छुट्टी करने वालों की ये अवधि डाइज-नॉन की जाए। यानी इसे अकार्य दिवस घोषित किया जाए। साथ ही 31 मई 2018 तक के सभी तबादला आदेशों की समीक्षा के आदेश भी दिए गए हैं, ताकि ये पता किया जाए कि कितने शिक्षकों ने इन आदेशों को छुट्टियों के बहाने नहीं माना? और क्या ये छुट्टियां पूर्व अनुमति से की गई या नहीं?

 31 मई, 2018 तक के सभी तबादला आदेशों की समीक्षा के आदेश भी दिए

हर महीने होगी ऐसे मामलों की समीक्षा

शिक्षा सचिव डॉ. अरुण शर्मा ने कहा है कि शिक्षा विभाग में जून 2018 यानी इसी महीने से ट्रांसफर आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए मासिक समीक्षा होगी। ऐसी छुट्टी जाने वाले शिक्षकों की सेवाओं को डाइज-नॉन किया जाएगा और इसका नियमों में प्रावधान पहले से है। शिक्षा निदेशक इस बारे में समीक्षा रिपोर्ट सीधे सचिव को भेजेंगे। इसी महीने से इस व्यवस्था को लागू किया जा रहा है।
क्या होती है डाइज-नॉन की सजा?
सर्विस रूल्स के अनुशासनात्मक कार्रवाई संबंधी प्रावधानों के अनुसार सरकार ऐसे अवकाश की अवधि को डाइज-नॉन यानी अकार्य दिवस घोषित कर सकती है, जो बिना पूर्व अनुमति के किया गया हो। ऐसा करने के बाद प्रमोशन, इन्क्रीमेंट जैसे सेवा लाभों के लिए ये अवधि काउंट नहीं होती। इस कारण इससे प्रमोशन या वेतनवृधि पर सीधा असर पड़ता है। हालांकि ये तकनीकी तौर पर ब्रेक इन सर्विस नहीं है।

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