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The High Court asked, how many tyrannical officers forcibly retired?

1 जनवरी, 2010 के बाद के सभी दागी अफसरों की सूची मांगी , 28 अफसरों पर चल रही विभागीय जांच, 16 के केस कोर्ट में

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला : प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से उन सभी अधिकारियों की सूची तलब की है, जिनके खिलाफ उनकी दागी छवि के कारण 1 जनवरी, 2010 के बाद या तो आपराधिक मामले दायर किए गए हैं या उनके खिलाफ विभागीय जांच लंबित है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा है कि क्या उन्होंने इस तरह के किसी अधिकारी को समय से पहले जनहित को ध्यान में रखते हुए जबरन सेवानिवृत्त किया है या नहीं? मुख्य सचिव द्वारा दायर शपथ पत्र का अवलोकन करने के पश्चात यह पाया कि शपथ पत्र में सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम नहीं दिए गए हैं, जो कि उनकी दागी छवि के कारण विभागीय विजिलेंस या पुलिस जांच का सामना कर रहे हैं।

फिलहाल न्यायालय के समक्ष दाखिल की गई सूची के मुताबिक 28 अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई चल रही है, जबकि 16 के खिलाफ विभिन्न न्यायालय के समक्ष या तो आपराधिक मामले लंबित पड़े हंै या उन्हें सजा होने के कारण बड़ी अदालतों में अपीलें लंबित हैं। न्यायालय ने पहले ही इस तरह के अधिकारियों को संवेदनशील पदों से हटाने बाबत आदेश जारी कर रखे हैं। मामले पर सुनवाई 19 जून को निर्धारित की गई है।

सुबाथू छावनी में अवैध निर्माण की रिपोर्ट तलब

प्रदेश उच्च न्यायालय ने कंटोनमेंट बोर्ड सुबाथू के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को आदेश दिए हैं कि वह शपथ पत्र के माध्यम से न्यायालय को बताएं कि कितने लोगों ने उस क्षेत्र में कानून के प्रावधानों के विपरीत निर्माण कार्य कर रखा है? न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने न्यायालय के समक्ष दायर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि कंटोनमेंट एरिया सबाथू में कई लोगों ने कानून के प्रावधानों के विपरीत कब्जा कर रखा है। न्यायालय ने इस तरह के लोगों के खिलाफ चल रही कार्रवाई की जानकारी भी न्यायालय के समक्ष रखने के आदेश जारी किए हैं। सुनवाई अब 3 मई को होगी।

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